(प्रणयकुमार बंडी)
चंद्रपुर (घुग्घुस) : शहर के प्रभाग क्रमांक 09 और 11 में मंगलवार (17 मार्च 2026) तड़के करीब 3 बजे कुछ अज्ञात युवकों द्वारा मचाए गए उत्पात ने कानून व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। सूत्रों के अनुसार, इन युवकों ने बिना किसी कारण आम नागरिकों के घरों की खिड़कियां तोड़ीं और इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। यह पूरी घटना “तीसरी आंख” यानी CCTV कैमरों में कैद होने की बात भी सामने आ रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी गंभीर घटना के बावजूद अब तक घुग्घुस पुलिस स्टेशन में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। यह स्थिति कई सवाल खड़े करती है—क्या पुलिस को शिकायत का इंतजार है या फिर खुफिया तंत्र पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है?
स्थानीय लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल साफ देखा जा सकता है, लेकिन उनकी चुप्पी भी संदेह के घेरे में है। क्या लोग डर के कारण सामने नहीं आ रहे हैं, या उन्हें भरोसा नहीं रहा कि उनकी शिकायत पर कार्रवाई होगी?
यह घटना केवल तोड़फोड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है। यदि शहर के बीचों-बीच रात के अंधेरे में इस तरह का आतंक फैलाया जा सकता है और पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का जिम्मा आखिर किसके हाथ में है?
अब यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में स्वतः संज्ञान लेता है या फिर किसी शिकायत के इंतजार में ही समय गंवाता रहेगा। अगर ऐसी घटनाओं पर तुरंत और सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह कानून व्यवस्था के लिए एक खतरनाक संकेत साबित हो सकता है।
घुग्घुस में फिलहाल एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या यहां कानून का डर खत्म हो चुका है?




