Thursday, April 30, 2026

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घुग्घुस में आवारा कुत्तों का आतंक: मासूम घायल, जवाबदेही से भागती नगर परिषद!

(प्रणयकुमार बंडी)

घुग्घुस शहर में आवारा कुत्तों का आतंक अब केवल डर का विषय नहीं रहा, बल्कि यह सीधे–सीधे नागरिकों की जान पर बन आया है। ताज़ा और बेहद शर्मनाक घटना नगर परिषद कार्यालय के पास सामने आई, जहाँ एक मासूम बच्चा अपने ही घर के दरवाजे पर खेलते समय कुत्ते के हमले का शिकार हो गया।

घायल बच्चे का नाम हमजा नौशाद राहिन बताया जा रहा है, जो क्षेत्र के मशहूर नौशाद किराना के संचालक का पुत्र है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बच्चा अकेला नहीं था—उसके परिजन ठीक वहीं मौजूद थे। पलक झपकते ही एक आवारा कुत्ते ने मासूम पर झपट्टा मारा और काट लिया। परिजनों ने तत्काल कुत्ते को भगाया और समय रहते बच्चे को इलाज के लिए अस्पताल पहुँचाया, जिससे उसकी जान बच सकी।

सवालों के कटघरे में नगर परिषद

इस घटना के बाद शहरभर में आक्रोश है और कई तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं—क्या शहर में आवारा कुत्तों की जिम्मेदारी किसी की नहीं? नगराध्यक्ष, मुख्याधिकारी और नगर सेवकों की भूमिका आखिर क्या है? क्या नगर परिषद किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है?

नगर परिषद कार्यालय के पास ही यह घटना होना, परिषद की कार्यप्रणाली पर करारा तमाचा है। यह साबित करता है कि निगरानी, योजना और ज़मीनी अमल—तीनों में नगर परिषद पूरी तरह विफल रही है।

सिर्फ योजनाएँ, ज़मीनी हकीकत शून्य

नगर परिषद द्वारा कागजों में पशु नियंत्रण, नसबंदी और टीकाकरण योजनाएँ तो दिखाई जाती हैं, लेकिन हकीकत में शहर की गलियों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं। मासूम बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएँ सबसे असुरक्षित हैं।

समाधान क्या हो? (सिर्फ बयान नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए)

अब समय आ गया है कि नगर परिषद नींद से जागे, केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि तुरंत कार्रवाई करे— आपातकालीन आवारा कुत्ता नियंत्रण अभियान तुरंत शुरू किया जाए। वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण अनिवार्य किया जाए। डॉग स्क्वॉड/रेस्क्यू टीम की स्थायी व्यवस्था हो। जिन क्षेत्रों में हमले हो रहे हैं, वहाँ तत्काल निगरानी और कार्रवाई की जाए। इस घटना की जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई हो।

चेतावनी है कि, आज एक मासूम घायल हुआ है, कल किसी की जान भी जा सकती है। यदि नगर परिषद ने अब भी आंखें मूँदे रखीं, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरना तय है।

घुग्घुस की जनता पूछ रही है— “जब बच्चा अपने ही घर के दरवाजे पर सुरक्षित नहीं है, तो नगर परिषद आखिर किस बात की जिम्मेदार है?”

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Pranaykumar Bandi

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