(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस नगर परिषद में इन दिनों सत्ता से ज़्यादा सियासी खींचातानी चर्चा में है। जनता ने स्पष्ट जनादेश देकर कांग्रेस को प्रथम नगराध्यक्ष पद और नगरसेवकों का बहुमत सौंपा, लेकिन जनादेश के बाद भी परिषद के भीतर शेष पदों—विशेषकर प्रथम नगर उपाध्यक्ष—को लेकर गहरी असमंजस और अंदरूनी विरोध सामने आ रहा है।
कांग्रेस खेमे में ही तस्वीर साफ नहीं है। जनता द्वारा चुने गए कुछ कांग्रेस नगरसेवक, पार्टी के ही राजीरेड्डी को प्रथम नगर उपाध्यक्ष के रूप में स्वीकारने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, कुछ नगरसेवक NCP (अजित पवार गट) के रवीश सिंग के नाम पर भी असहमति जता रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाज़िमी है— क्या कांग्रेस का बहुमत अब भी एकजुट है? या फिर यही फूट बीजेपी के लिए अवसर का द्वार खोल देगी?
बीजेपी की नज़र: बहुमत की गणित या मौके की राजनीति?
शहर में यह चर्चा तेज़ है कि यदि कांग्रेस और एनसीपी के भीतर यह असंतोष गहराता है, तो बीजेपी राजनीतिक चतुराई से संख्याबल जुटाकर प्रथम नगर उपाध्यक्ष की गद्दी पर कब्ज़ा कर सकती है। यह स्थिति उस जनादेश के ठीक उलट होगी, जो जनता ने चुनाव में दिया था। ऐसे में यह सिर्फ एक पद की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक नैतिकता की भी परीक्षा बन गई है।
वायरल पोस्ट और आज का कार्यक्रम: सियासत का निर्णायक दिन?
इसी बीच सोशल मीडिया पर घुग्घुस कांग्रेस कमिटी की ओर से वायरल एक पोस्ट ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है। पोस्ट के अनुसार आज घुग्घुस में
“प्रथम नगराध्यक्ष पदग्रहण सोहळा व उपाध्यक्ष निवडणुकीचा कार्यक्रम”
आयोजित किया गया है।
घोषणा के मुताबिक, दिनांक: 07 जनवरी 2026, समय: सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक, स्थान: नगर परिषद, घुग्घुस.
इस अवसर पर नव-निर्वाचित प्रथम नगराध्यक्ष दीप्ती सुजित सोनटक्के का पदग्रहण समारोह होगा। साथ ही, विजय वड्डेटीवार के निर्धारित दौरे के अनुसार उनकी उपस्थिति में उपाध्यक्ष पद की चुनाव प्रक्रिया भी संपन्न की जाएगी। कांग्रेस ने शहर के नागरिकों से इस “ऐतिहासिक क्षण” का साक्षी बनने की अपील की है।
जनता पूछ रही है सवाल
लेकिन जनता के मन में सवाल साफ है—क्या यह समारोह जनादेश की जीत का उत्सव होगा, या भीतरखाने चल रही सियासी शतरंज का पर्दाफ़ाश? क्या सत्ता की लालसा, सिद्धांतों और जनभावनाओं पर भारी पड़ जाएगी?
आज का दिन तय करेगा कि प्रथम नगर उपाध्यक्ष की इस शतरंज में कौन बाज़ी मारेगा,
और किसके सपनों पर सत्ता की चाल पानी फेर देगी।
घुग्घुस की जनता अब सिर्फ तमाशबीन नहीं रहना चाहती—उसे जवाब चाहिए, पारदर्शिता चाहिए और सबसे बढ़कर अपने जनादेश का सम्मान चाहिए।




