(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर : दिवाली का पर्व रोशनी और खुशियों का प्रतीक है, लेकिन इस बार घुग्घुस नगर परिषद की कार्यप्रणाली ने इस त्यौहार की चमक पर सवालिया साया डाल दिया है। नगर परिषद कार्यालय के अंतर्गत पटाका दुकानों को परमीशन देने को लेकर अब कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे पहले, यह जानना बेहद जरूरी है कि जिस जमीन पर पटाका दुकानें लगाई गई हैं, वह जमीन अडानी एसीसी कंपनी से संबंधित बताई जा रही है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या इस भूमि के लिए संबंधित विभागों और कंपनी से NOC (अनापत्ति प्रमाणपत्र) लिया गया है या नहीं। यदि NOC नहीं लिया गया है, तो परमीशन आखिर किस अधिकारी ने दिया और किस अधिकार से दिया? यह सवाल अब आम जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुका है।
सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल
पटाका दुकानें ऐसे संवेदनशील उत्पाद बेचती हैं जिनमें विस्फोटक सामग्री होती है। ऐसे में फायर सेफ्टी, पुलिस सुरक्षा, और स्थानीय प्रशासन की मंजूरी अनिवार्य होती है। लेकिन सवाल यह है कि नगर परिषद ने पटाका परमीशन देते समय इन सुरक्षा मानकों का पालन किया या नहीं?
यदि किसी भी प्रकार की दुर्घटना होती है, तो क्या नगर परिषद अधिकारी, पुलिस प्रशासन या स्थानीय जनप्रतिनिधि इसकी जिम्मेदारी लेंगे? या फिर हमेशा की तरह “जांच चल रही है” कहकर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा?
खतरे के बीच बाजार और शराब की दुकानें
जिस स्थान पर पटाका दुकानें लगाने की अनुमति दी गई है, उसके आसपास देशी-विदेशी शराब की दुकान और एक बीयर बार कुछ ही कदमों की दूरी पर मौजूद हैं। ऐसे में आग लगने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
रविवार के दिन साप्ताहिक बाजार में हजारों की भीड़ उमड़ती है — बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सभी खरीददारी के लिए पहुंचते हैं। इस स्थिति में भीड़ के बीच विस्फोटक पदार्थों की बिक्री किसी भी समय बड़ा हादसा कर सकती है।
यह देखकर लगता है कि पुलिस और नगर परिषद ने या तो सुरक्षा नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज किया है, या किसी “राजनैतिक दबाव” में आंखें मूंद ली हैं।
गोदाम कहां हैं? सुरक्षा निरीक्षण हुआ क्या?
पटाका दुकानों को परमीशन तो दे दी गई, लेकिन इन पटाकों का स्टॉक कहां रखा जा रहा है, किस गोदाम में, किन सुरक्षा प्रबंधों के साथ — यह किसी को पता नहीं। क्या पुलिस ने इन गोदामों का निरीक्षण किया है?
या फिर सिर्फ “कागजों पर सुरक्षा जांच” पूरी कर दी गई है? यदि वास्तव में ऐसा हुआ है, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि जन सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।




