गडचांदूर, चंद्रपुर : एक गांव, दो तहसील और विकास के नाम पर वर्षों का इंतजार—नवेगांव की यह तस्वीर शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब 30 वर्षों से नवेगांव विकास की मुख्यधारा से दूर है। गांव कोरपना तहसील में आता है, जबकि इसकी ग्राम पंचायत वरोडा का प्रशासनिक संबंध राजुरा तहसील से होने के कारण विकास कार्यों को लेकर लगातार प्रशासनिक उलझन बनी हुई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक व्यवस्था की इस विसंगति का सीधा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। सरकारी योजनाओं, विकास निधि और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों के लिए ग्रामीणों को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब गांव एक तहसील में और ग्राम पंचायत दूसरे तहसील के प्रशासनिक दायरे में है, तो विकास कार्यों की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

सड़क पर गड्ढे या विकास व्यवस्था पर सवाल?
नवेगांव को जोड़ने वाली सड़क कई स्थानों पर जर्जर हो चुकी है। जगह-जगह गड्ढों के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति और खराब हो जाती है तथा दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत के लिए संबंधित प्रशासन से कई बार मांग की गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वर्षों से लंबित मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए भी ग्रामीणों को प्रशासनिक सीमाओं की लड़ाई लड़नी पड़ेगी?
नालियों की बदहाली से बढ़ रही परेशानी
गांव की नालियों की स्थिति भी खराब बताई जा रही है। सांडपानी की उचित निकासी नहीं होने से जगह-जगह गंदगी और दुर्गंध फैल रही है। मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से नागरिकों के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।
ग्रामीणों ने नियमित नालियों की सफाई के साथ स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की मांग की है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
श्मशानभूमि का अधूरा काम भी बना परेशानी
नवेगांव की श्मशानभूमि का काम शुरू होने के बाद भी पूर्ण नहीं हुआ है। अंतिम संस्कार जैसी अत्यंत आवश्यक सुविधा का काम वर्षों तक अधूरा रहना ग्रामीणों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने श्मशानभूमि का काम तत्काल पूरा करने की मांग की है।
“दो तहसीलों की व्यवस्था में गांव की गलती क्या?”
नवेगांव के नागरिकों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासनिक सीमाओं और व्यवस्थाओं के बीच आम ग्रामीण क्यों पिसे? शासन की योजनाएं नागरिकों तक पहुंचाने और विकास निधि उपलब्ध कराने के लिए प्रशासनिक व्यवस्था बनाई गई है, लेकिन यदि वही व्यवस्था ग्रामीणों के लिए बाधा बन जाए तो उसकी समीक्षा कौन करेगा?
ग्रामीणों का कहना है कि अब आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट प्रशासनिक निर्णय और जमीन पर विकास कार्य चाहिए।
कोरपना में शामिल करने की मांग
नवेगांव को राजुरा तहसील में शामिल करने अथवा नवेगांव ग्राम पंचायत को कोरपना तहसील के प्रशासनिक दायरे में शामिल करने की मांग जोर पकड़ रही है। ग्रामीणों का मानना है कि इससे प्रशासनिक असमंजस दूर होगा, विकास कार्यों में गति आएगी और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।
सड़क की मरम्मत, शिक्षा से जुड़ी समस्याओं का समाधान, नालियों की व्यवस्था, श्मशानभूमि का अधूरा काम पूरा करने और पर्याप्त विकास निधि उपलब्ध कराने की मांग भी ग्रामीणों ने की है।
नवेगांव के नागरिक बबन पेंदोर का कहना है कि दो तहसीलों की खींचतान में गांव का विकास रुक गया है। नवेगांव को कोरपना तहसील की ग्राम पंचायत में शामिल किया जाए, ताकि विकास को गति मिले और शासन की योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंच सके।
अब नजर शासन और संबंधित प्रशासन के अगले कदम पर है। सवाल सिर्फ नवेगांव के विकास का नहीं, बल्कि यह भी है कि प्रशासनिक व्यवस्था आखिर जनता की सुविधा के लिए है या जनता को कार्यालयों के चक्कर लगवाने के लिए?




