नगर परिषद कार्यालय के सामने करीब दो घंटे प्रदर्शन; मंजूरी रद्द करने और पुराने रास्ते को बहाल करने की मांग
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : शांतिनगर परिसर स्थित बौद्ध विहार की ओर जाने वाले पुराने रास्ते को बंद कर खुली जगह पर अस्पताल निर्माण के लिए दी गई मंजूरी को तत्काल रद्द करने की मांग को लेकर बौद्ध समाज के नागरिकों ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को घुग्घुस नगर परिषद कार्यालय के सामने करीब दो घंटे तक धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में नागरिकों ने नगर परिषद प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए विहार का रास्ता पूर्ववत रखने और अस्पताल निर्माण संबंधी प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की।
नगर परिषद में सोमवार को सर्वसाधारण सभा आयोजित की गई थी। इसी दौरान दोपहर करीब 11.30 बजे बौद्ध समाज के नागरिक बड़ी संख्या में नगर परिषद कार्यालय पहुंचे। नागरिकों के अनुसार शांतिनगर स्थित सर्वे क्रमांक 167 में मुख्य सड़क में बदलाव करते हुए करीब 2,550 वर्ग मीटर खुली जगह पर अस्पताल निर्माण के लिए नगर परिषद की 19 अप्रैल को हुई सर्वसाधारण सभा में प्रस्ताव पारित किया गया था। इसी प्रस्ताव को रद्द करने की मांग आंदोलनकारियों ने की।
विहार का पुराना रास्ता बंद करने पर विरोध
बौद्ध समाज के नागरिकों का कहना है कि शांतिनगर के समीप स्थित बौद्ध विहार की ओर जाने वाला पुराना रास्ता बंद कर उसी क्षेत्र की खुली जगह पर अस्पताल निर्माण की मंजूरी देना उचित नहीं है। नागरिकों ने नगर परिषद से मांग की कि विहार के आवागमन का रास्ता किसी भी स्थिति में बंद न किया जाए तथा अस्पताल निर्माण से संबंधित मंजूरी को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का प्रस्ताव पारित किया जाए। इस संबंध में नगर परिषद अध्यक्ष दीप्ति सोन टक्के को ज्ञापन भी सौंपा गया।
कलेक्टर के पास बैठक बुलाने का आश्वासन
नगराध्यक्ष दीप्ति सोन टक्के के अनुसार शांतिनगर स्थित विहार से संबंधित विषय को विचार-विमर्श और निर्णय के लिए सर्वसाधारण सभा के समक्ष रखा गया था। उन्होंने बताया कि इस मामले को लेकर जल्द ही जिलाधिकारी के स्तर पर बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में समाज के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाएगा और जिलाधिकारी द्वारा दिए जाने वाले निर्णय के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।

‘नगर परिषद जनता के लिए या कंपनी के लिए?’—नागरिकों का सवाल
धरने के दौरान नागरिकों ने लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए। नागरिकों का कहना है कि लोकतंत्र में शासन “जनता का, जनता के द्वारा और जनता के लिए” माना जाता है। इसी उम्मीद से नगर परिषद बनाई गई और जनता ने अपने प्रतिनिधियों को चुनकर जिम्मेदारी सौंपी।
नागरिकों ने सवाल उठाया कि जब किसी मामले का संबंध सीधे स्थानीय जनता, गांव और उनके धार्मिक-सामाजिक स्थलों से हो, तो क्या जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता जनता के हितों की रक्षा करना नहीं होना चाहिए?
बौद्ध समाज के नागरिकों ने यह भी सवाल उठाया कि जिस समाज का राजनीतिक रूप से विभिन्न दलों को समर्थन मिलता रहा है, उसी समाज की धार्मिक और सामाजिक मांगों को अनदेखा क्यों किया जा रहा है। साथ ही नागरिकों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सांसद की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि जनता की भावनाओं और मांगों को लेकर उनकी स्पष्ट भूमिका क्या है?
धरने में यह सवाल भी प्रमुखता से उठाया गया कि “नगर परिषद जनता के लिए काम करेगी या कंपनियों के हितों के लिए?”
विरोधी पक्ष नेता ने भी उठाए सवाल
नगर परिषद की विरोधी पक्ष नेता मीणा चांद मोरपाका ने भी इस मुद्दे पर तीखी आलोचना की। उन्होंने सर्वसाधारण सभा की विषय सूची में शांतिनगर विहार से संबंधित विषय शामिल किए जाने को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले पर गंभीरता से चर्चा होना आवश्यक है और संबंधित समाज की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
24 अगस्त की सर्वसाधारण सभा की विषय सूची में क्रमांक 9 पर “मा. अध्यक्ष के अनुसार शांतिनगर स्थित विहार से संबंधित विषय पर विचार-विमर्श” को सभा के विचारार्थ एवं निर्णयार्थ रखा गया था।
इसी विषय सूची में नगर परिषद क्षेत्र में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने, विभिन्न विकास कार्यों, रेल फाटक क्रमांक 39-G को आम जनता के आवागमन के लिए शुरू करने, नाली निर्माण, प्रभागों के विकास, देशी शराब दुकान के स्थानांतरण सहित कई अन्य विषय भी शामिल थे।
‘विहार के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं’—अमित बोरकर
आंदोलन के दौरान अमित बोरकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बौद्ध विहार के मुद्दे पर समाज किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि समाज की मांग पर न्याय मिलना चाहिए। यदि मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में इससे भी तीव्र आंदोलन किया जाएगा।
बड़ी संख्या में समाज के नागरिक रहे मौजूद
धरने के दौरान बोधिसत्व बुद्ध विहार व ध्यान साधना केंद्र समिति, शांतिनगर, घुग्घुस के पदाधिकारी एवं सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
समिति के अध्यक्ष भंते रत्नमनी थेरो, कार्याध्यक्ष सुमेध पाटील, उपाध्यक्ष भंते संघरक्षीत थेरो, भंते अग्गधम्म, भंते शिलरक्षीत और भारती निमसटकर, कोषाध्यक्ष प्रज्योत घोरघाटे, सचिव भिमेंद्र कांबळे, सहकोषाध्यक्ष ममता निमसटकर, सहसचिव सविता मंडे और माला मेश्राम सहित मंगेश नगराळे, अमित सहारे, शंकर दुर्गे, नागेश पठाडे, गंगाधर गायकवाड, योगीता मुन, ममता चांदेकर, अलका चुनारकर, नैना ढोके, अनिता कोल्हे, शिलाताई पडवेकर, अमित बोरकर, विकास खाडे, माया ताई सांड्रावार, अंकिता कांबळे, छाया नगराडे, उर्मिला लिहितकर सहित बड़ी संख्या में बौद्ध समाज के नागरिक उपस्थित थे।
अब सभी की नजर प्रस्तावित जिलाधिकारी स्तरीय बैठक और उसमें होने वाले निर्णय पर टिकी है। समाज ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि विहार के रास्ते और अस्पताल निर्माण संबंधी मांग पर संतोषजनक निर्णय नहीं हुआ, तो आंदोलन को आगे और तेज किया जा सकता है।




