Thursday, August 20, 2026

Breathe of Life Multipurpose Society UCO BANK- A/C- 09110110049020, IFSC : UCBA0000911, MICR CODE : 442028501

spot_img
spot_img

प्रभाग क्रमांक 10 में बदहाल नालियां: जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ या ठेकेदार पर मेहरबानी?

प्रणयकुमार बंडी

घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस नगर परिषद के प्रभाग क्रमांक 10 में अंडरग्राउंड नालियों की बदहाल स्थिति ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, परिसर में बनाई गई नालियों के लगभग सभी ढक्कन टूट चुके हैं, जिससे राहगीरों, बच्चों, बुजुर्गों और वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नालियां सार्वजनिक क्षेत्र में बनी हैं और उनके ढक्कन इतनी बड़ी संख्या में टूट चुके हैं, तो नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की नजर इस समस्या पर अब तक क्यों नहीं पड़ी?

प्रभाग क्रमांक 10 की इस स्थिति को लेकर नगरसेवक, नगरसेविका, नगराध्यक्ष, मुख्याधिकारी, बांधकाम सभापति, आरोग्य सभापति, नियोजन एवं विकास सभापति सहित विधायक, सांसद और जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। जनता के टैक्स से होने वाले विकास कार्य यदि कुछ ही समय में खराब स्थिति में पहुंच जाते हैं, तो आखिर जवाबदेही किसकी तय होगी?

निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल

अंडरग्राउंड नालियां बनने के बावजूद उनके ढक्कनों का बड़े पैमाने पर टूटना निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता को लेकर संदेह पैदा करता है। हालांकि इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभाग द्वारा तकनीकी जांच और गुणवत्ता परीक्षण कराया जाना आवश्यक है।

नागरिकों का सवाल है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था, तो इतनी बड़ी संख्या में ढक्कन टूटने का कारण क्या है? क्या निर्माण के दौरान गुणवत्ता नियंत्रण की उचित व्यवस्था थी? क्या संबंधित अधिकारियों ने काम पूरा होने के बाद स्थल निरीक्षण किया था?

अधिकारी लिखित शिकायत का इंतजार कर रहे हैं?

इस मामले में सबसे तीखा सवाल नगर परिषद प्रशासन से पूछा जा रहा है—क्या अधिकारियों को कार्रवाई करने के लिए पहले किसी नागरिक की लिखित शिकायत का इंतजार करना जरूरी है?

यदि सार्वजनिक रास्ते पर खुले या टूटे हुए नाली ढक्कन अधिकारियों की नजर में आने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती, तो यह प्रशासनिक उदासीनता का विषय बन जाता है। वहीं यदि समस्या अधिकारियों के संज्ञान में नहीं है, तो नियमित निरीक्षण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं।

जनता के पैसों से बने सार्वजनिक निर्माण कार्यों की सुरक्षा और गुणवत्ता की निगरानी करना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी है। किसी दुर्घटना के बाद जागने के बजाय दुर्घटना से पहले कार्रवाई करना ही जिम्मेदार प्रशासन की पहचान होनी चाहिए।

ठेकेदार पर मेहरबानी क्यों?

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी चर्चा में है कि नगर परिषद प्रशासन संबंधित ठेकेदार के प्रति इतना नरम रवैया क्यों अपना रहा है? क्या टूटे हुए ढक्कनों की मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए ठेकेदार को जिम्मेदार ठहराया गया है? क्या निर्माण कार्य की गारंटी या दोष दायित्व अवधि के तहत कार्रवाई की गई है?

इन सवालों का जवाब नगर परिषद प्रशासन को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए। साथ ही, यदि जांच में निर्माण की गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो नियमानुसार संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।

“टैक्स जनता देती है, जवाबदेही भी जनता के प्रति होनी चाहिए”

जनता से विभिन्न प्रकार के कर वसूलकर विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं। ऐसे में यदि सार्वजनिक निर्माण कुछ समय बाद ही टूटने लगे और उसकी मरम्मत के लिए फिर सरकारी निधि खर्च करनी पड़े, तो यह सीधे तौर पर सार्वजनिक धन के उपयोग और जवाबदेही का सवाल बन जाता है।

प्रभाग क्रमांक 10 के नागरिकों की मांग है कि नगर परिषद तत्काल मौके का निरीक्षण करे, टूटे हुए सभी नाली ढक्कनों की स्थिति का पंचनामा तैयार करे, निर्माण कार्य की तकनीकी गुणवत्ता की जांच कराए और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करे।

अब सवाल सिर्फ टूटी नालियों का नहीं, बल्कि नगर परिषद की जवाबदेही का है।
जनता यह जानना चाहती है कि इन नालियों की हालत कब सुधरेगी, जिम्मेदारी किसकी तय होगी और क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है?

यदि जनता के टैक्स का पैसा विकास के नाम पर खर्च हो रहा है, तो उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए—वरना सवाल उठते रहेंगे कि विकास कार्य हो रहे हैं या जनता के पैसों की बर्बादी?

spot_img

Pranaykumar Bandi

WhatsApp No - 9112388440
WhatsApp No - 9096362611
Email id: vartamanvarta1@gmail.com

RELATED ARTICLES
Today News

Breaking News

Crime News