(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर – घुग्घुस के शांति नगर वासियों ने अपने हक और बुनियादी सुविधाओं के लिए सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। 14 अगस्त 2025 को दोपहर 1 बजे से 4 बजे तक घुग्घुस के एक आयरन कंपनी के मुख्य गेट के पास स्थित सरकारी जगह पर एक दिवसीय धरना आंदोलन किया जाएगा। यह आंदोलन कंपनी और नगर परिषद प्रशासन के खिलाफ होगा।
शांति नगर की कहानी 1995 से शुरू होती है, जब घुग्घुस में एक आयरन कंपनी की स्थापना के बाद वहां के लोगों को बाहर बसाया गया। उस समय घर के पट्टे और अस्थायी व्यवस्था देने का वादा किया गया था, लेकिन पिछले 30 वर्षों में यह बस्ती उपेक्षा का शिकार बनी रही। नालियों के अभाव में बरसात में गंदा पानी जमा होता है, जिससे सांप-बिच्छू का खतरा बढ़ जाता है। साफ पीने का पानी, पक्की सड़कें, स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी नदारद हैं। रोजगार और शिक्षा के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के समय भी इस उपेक्षा के चलते शांति नगर के लोगों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है। चेतावनी दी गई है कि यदि प्रशासन और कंपनी ने तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए, तो 15 अगस्त 2025 को दोपहर 12 बजे वर्धा नदी में सामूहिक जल समाधि ली जाएगी।
मुख्य मांगें:
हर परिवार को घर के पट्टे दिए जाएं।
प्रत्येक परिवार के एक सदस्य (महिला/पुरुष) को कंपनी में शारीरिक व शैक्षणिक योग्यता के अनुसार रोजगार दिया जाए।
साफ पीने का पानी, पक्की सड़कें, नालियां, स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक शौचालय की व्यवस्था की जाए।
उठते सवाल:
कंपनी 1995 से अब तक शांति नगर वासियों के प्रति गंभीर क्यों नहीं रही?
घर पट्टे और मूलभूत सुविधाएं देने का वादा कागजों तक ही सीमित क्यों रह गया?
शांति नगर वासियों को धरना और जल समाधि जैसे चरम फैसले क्यों लेने पड़ रहे हैं?
अधिकारियों की भूमिका अब तक क्या रही?
शहर के विभिन्न दलों के नेताओं ने इतने सालों में इस ओर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई?
क्या अब प्रशासन और कंपनी साम, दंड, भेद जैसी नीति अपनाएंगे या समस्याओं का समाधान निकालेंगे?
समाज के विभिन्न वर्गों से इस आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और कंपनी इन गंभीर समस्याओं को हल करने के लिए आगे आते हैं या नहीं।





