Thursday, August 27, 2026

Breathe of Life Multipurpose Society UCO BANK- A/C- 09110110049020, IFSC : UCBA0000911, MICR CODE : 442028501

spot_img
spot_img

25 जून 1975: भारतीय लोकतंत्र पर आपातकाल की काली छाया

25 जून का दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसे मोड़ के रूप में याद किया जाता है, जब देश की जनता ने अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यक्तिगत अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों को खो दिया था। इस दिन वर्ष 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश पर आपातकाल थोप दिया गया था, जिसने भारत के संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया।

आपातकाल की पृष्ठभूमि

आपातकाल की घोषणा का तात्कालिक कारण राजनीतिक था। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 12 जून 1975 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्वाचन को भ्रष्ट आचरण के आधार पर अमान्य घोषित किया था। इस निर्णय के बाद उन पर इस्तीफे का दबाव बढ़ने लगा। लेकिन इसके स्थान पर उन्होंने राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की अनुमति से 25 जून 1975 की मध्यरात्रि से आपातकाल की घोषणा कर दी।

आपातकाल के दुष्परिणाम

आपातकाल की अवधि (25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक) भारतीय लोकतंत्र के लिए एक काली अवधि मानी जाती है। इस दौरान:

प्रेस की स्वतंत्रता पर कठोर सेंसरशिप लगाई गई।

हजारों विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना किसी मुकदमे के जेल में डाल दिया गया।

न्यायपालिका पर भी दबाव बनाया गया, और नागरिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया।

जबरन नसबंदी जैसे क्रूर अभियान चलाए गए, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए।

प्रतिरोध और संघर्ष

इस दौर में अनेक साहसी लोगों ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाई। जयप्रकाश नारायण जैसे नेता ने ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया। अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडीस, अर्जुन सिंह बिष्ट सहित कई नेताओं ने जेल की यातनाएँ सही लेकिन झुके नहीं। पत्रकारों, छात्रों और आम नागरिकों ने भी विभिन्न रूपों में विरोध दर्ज कराया।

स्मरण और सीख

25 जून हमें उन लाखों लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने अभिव्यक्ति, स्वतंत्रता और न्याय के लिए आवाज उठाई। यह दिन हमें चेताता है कि लोकतंत्र को केवल अधिकार समझकर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी समझकर जीना चाहिए।

आपातकाल केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि यह लोकतंत्र की आत्मा पर गहरा प्रहार था। यह जरूरी है कि हम इस दिन को केवल एक स्मृति के रूप में नहीं, बल्कि एक चेतावनी के रूप में देखें। ताकि भविष्य में ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले देश सचेत हो और लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़ा हो जाए।

“लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी जनता होती है। जब जनता जागरूक हो, तो कोई भी सत्ता उसे लंबे समय तक दबा नहीं सकती।”

spot_img

Pranaykumar Bandi

WhatsApp No - 9112388440
WhatsApp No - 9096362611
Email id: vartamanvarta1@gmail.com

RELATED ARTICLES
Today News

Breaking News

Crime News