प्रणयकुमार बंडी
तिरुमला (आंध्र प्रदेश): भक्ति और श्रद्धा के सामने उम्र कभी बाधा नहीं बनती। इसका प्रेरणादायक उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब 116 वर्षीय एक वृद्ध श्रद्धालु ने तिरुमला स्थित भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी (श्रीवारी) के दिव्य दर्शन कर अपनी अटूट आस्था का परिचय दिया।
अत्यंत वृद्धावस्था के बावजूद श्रद्धालु ने पूरे विश्वास और भक्ति के साथ श्रीवारी के दर्शन किए। मंदिर प्रशासन द्वारा उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई, जिससे उनका दर्शन सुगमता और सम्मानपूर्वक संपन्न हो सका। श्रीवारी के दर्शन के बाद वृद्ध श्रद्धालु भावुक हो उठीं और इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बताया।
तिरुमला में यह दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए भी भावनात्मक और प्रेरणादायक बन गया। 116 वर्ष की आयु में भी ईश्वर के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा ने सभी को यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति का संबंध न तो उम्र से होता है और न ही शारीरिक सामर्थ्य से, बल्कि यह हृदय की गहराइयों से जुड़ी होती है।
यह घटना भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी और उनके भक्तों के बीच उस शाश्वत एवं अटूट आध्यात्मिक संबंध को भी दर्शाती है, जो समय और आयु की सभी सीमाओं से परे है। तिरुमला में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु श्रीवारी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन 116 वर्षीय श्रद्धालु की यह भक्ति सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई।
इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी वृद्ध भक्त की दृढ़ आस्था को नमन करते हुए उनके स्वस्थ एवं मंगलमय जीवन की कामना की। यह प्रेरक प्रसंग एक बार फिर सिद्ध करता है कि सच्ची श्रद्धा और ईश्वर के प्रति समर्पण जीवनभर मनुष्य को आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करते हैं।




