Saturday, June 6, 2026

Breathe of Life Multipurpose Society UCO BANK- A/C- 09110110049020, IFSC : UCBA0000911, MICR CODE : 442028501

spot_img
spot_img

घरकुल योजना पर सवाल: वादों से आगे बढ़ेगा प्रशासन या बेघर परिवारों की उम्मीदें फिर होंगी अधूरी?

प्रणयकुमार बंडी

घुग्घुस, चंद्रपुर : नगर परिषद चुनाव 2025 के दौरान सत्ता पक्ष द्वारा जारी किए गए चुनावी जाहिरनामे में जनता से विकास और जनकल्याण से जुड़े कुल 37 आकर्षक वादे किए गए थे। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण वादा क्रमांक 20 पर दर्ज था— “हक्काची घरे नसलेल्या नागरिकांसाठी प्रामाणिकरित्या घरकुल योजना राबवण्यात येईल” अर्थात जिन नागरिकों के पास अपना घर नहीं है, उनके लिए ईमानदारी से घरकुल योजना लागू की जाएगी।

चुनाव बीत चुके हैं, सत्ता स्थापित हो चुकी है, लेकिन आज भी घुग्घुस शहर में घरकुल योजना का मुद्दा जस का तस बना हुआ दिखाई देता है। वर्षों से अनेक जरूरतमंद परिवार अपने पक्के घर के सपने को पूरा करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शासन की योजनाएं कागजों पर मौजूद हैं, पात्रता की शर्तें भी निर्धारित हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर लाभार्थियों तक योजना पहुंचाने की प्रक्रिया कई सवालों के घेरे में है।

जानकारों के अनुसार महाराष्ट्र में प्रधानमंत्री आवास योजना, रमाई आवास योजना, शबरी आवास योजना सहित विभिन्न आवास योजनाएं संचालित हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य बेघर अथवा कच्चे और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। लेकिन पात्रता, दस्तावेजों की जटिलता, प्रशासनिक प्रक्रियाओं की धीमी गति और विभिन्न स्तरों पर समन्वय के अभाव के कारण अनेक जरूरतमंद परिवार लाभ से वंचित रह जाते हैं।

शहरी क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय वर्ग (LIG) और मध्यम आय वर्ग (MIG) के लिए आय सीमा निर्धारित है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण और वास्तविक आवासीय स्थिति के आधार पर पात्रता तय की जाती है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जो न तो योजना से बाहर होने की स्थिति में हैं और न ही लाभ प्राप्त कर पा रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए यह स्थिति “करो या मरो, लेकिन लाभ नहीं” जैसी बनती जा रही है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि घरकुल योजना की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन नगर परिषद क्षेत्र में इस दिशा में अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही। शहर में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि यदि चुनावी वादों को प्राथमिकता के साथ लागू किया जाता, तो अब तक अनेक परिवारों को राहत मिल सकती थी।

इस मुद्दे पर नगर परिषद प्रशासन, टाउन प्लानिंग विभाग, जनविकास से जुड़े तंत्र, जिला प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में नजर आ रही है। जनता पूछ रही है कि आखिर गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए ठोस पहल क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासनिक योजना का अभाव, संसाधनों की कमी और विभागों के बीच समन्वय का संकट इस योजना की राह में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है?

नागरिकों का मानना है कि योजनाओं की घोषणा करना जितना आसान है, उन्हें जमीन पर उतारना उतना ही कठिन और जिम्मेदारी भरा कार्य है। यदि पात्र लाभार्थियों तक योजना नहीं पहुंचती, तो चुनावी वादों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न खड़े होना स्वाभाविक है।

शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी केवल नियम बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि पात्र नागरिकों को योजनाओं का वास्तविक लाभ दिलाना भी उतना ही आवश्यक है। यदि कहीं लापरवाही, उदासीनता या प्रक्रियागत अड़चनें हैं तो उन्हें दूर करना संबंधित विभागों का दायित्व है। आवश्यकता पड़ने पर उच्च स्तरीय समीक्षा और जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि “घरकुल योजना को ईमानदारी से लागू करने” का जो वादा चुनावी मंच से किया गया था, वह पहले वर्ष में कितनी सफलता की राह पर है? क्या बेघर परिवारों के सपनों को सच करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं, या फिर यह मुद्दा भी अन्य अधूरे वादों की सूची में शामिल होने जा रहा है?

इसका जवाब आने वाले वर्षों में नहीं, बल्कि वर्तमान की जमीनी हकीकत देगी। जनता देख रही है, सवाल पूछ रही है और अपने वादों के आधार पर सत्ता पक्ष का मूल्यांकन भी कर रही है। अगले पांच वर्षों में राजनीति नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले कार्य ही तय करेंगे कि जनता सही थी या फिर चुनावी वादों पर भरोसा करने का उसका फैसला।

spot_img

Pranaykumar Bandi

WhatsApp No - 9112388440
WhatsApp No - 9096362611
Email id: vartamanvarta1@gmail.com

RELATED ARTICLES
Today News

Breaking News

Crime News