Thursday, May 28, 2026

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घुग्घुस की बदहाल व्यवस्था पर उठते सवाल : आधुनिकता के नाम पर सिर्फ भाषण, ज़मीन पर व्यवस्था बेहाल

प्रणयकुमार बंडी

घुग्घुस, चंद्रपुर : उद्योग नगरी के रूप में पहचान रखने वाला घुग्घुस आज भी बुनियादी शहरी सुविधाओं के लिए संघर्ष करता दिखाई दे रहा है। नगर परिषद कार्यालय और शहर की सफाई व्यवस्था को देखकर साफ महसूस होता है कि आधुनिक मशीनों और संसाधनों की भारी कमी अब भी बनी हुई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पड़ोसी जिले गढ़चिरौली की एटापल्ली नगर पंचायत तक आधुनिक सफाई मशीनों और व्यवस्थाओं का उपयोग कर रही है, तो फिर करोड़ों की आर्थिक गतिविधियों वाले घुग्घुस को आखिर किस बात की सजा दी जा रही है?

शहरवासियों के बीच अब यह चर्चा खुलकर होने लगी है कि क्या घुग्घुस की टाउन प्लानिंग, स्वच्छता व्यवस्था और मेंटनेंस की योजनाएं सिर्फ सरकारी फाइलों और बैठकों तक सीमित हैं? जमीनी हकीकत यह है कि शहर के कई हिस्सों में नियमित सफाई, कचरा प्रबंधन और आधुनिक शहरी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है। नगर परिषद द्वारा समय-समय पर “स्वच्छ सर्वेक्षण”, “माझी वसुंधरा अभियान” और विकास योजनाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन नागरिकों को उसका ठोस परिणाम दिखाई नहीं दे रहा।

राजनीतिक गलियारों में भी यह मुद्दा अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगराध्यक्ष, मुख्याधिकारी, सभापति और नगर परिषद के सदस्य आधुनिक सुविधाओं, बैठकों, दौरों और सरकारी संसाधनों का लाभ तो ले रहे हैं, लेकिन शहर को आधुनिक दिशा देने के लिए कोई ठोस और दीर्घकालिक योजना धरातल पर नजर नहीं आती। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर नगर प्रशासन की प्राथमिकता शहर का विकास है या केवल कागजी उपलब्धियां दिखाना?

घुग्घुस जैसे राजस्व और औद्योगिक महत्व वाले शहर में यदि आधुनिक सफाई मशीनें, स्मार्ट कचरा प्रबंधन और सुव्यवस्थित नगर नियोजन नहीं दिखता, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उद्योगों से निकलने वाला राजस्व आखिर शहर के विकास में क्यों नहीं दिखाई देता? सड़कों की स्थिति, नालों की सफाई, कचरा उठाव और सार्वजनिक सुविधाओं की हालत देखकर लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है।

अब उंगलियां केवल नगर परिषद तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि जिला प्रशासन और मंत्रालय की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। नागरिक पूछ रहे हैं कि क्या जिला प्रशासन घुग्घुस के विकास को लेकर गंभीर है? क्या मंत्रालय स्तर पर इस शहर की समस्याओं की ओर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है? जब छोटे नगर आधुनिक संसाधनों से लैस हो सकते हैं, तो घुग्घुस क्यों पिछड़ रहा है?

शहरवासियों की निगाहें अब प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर टिकी हुई हैं। जनता जवाब चाहती है कि आखिर घुग्घुस को आधुनिक शहर बनाने की दिशा में वास्तविक कदम कब उठाए जाएंगे। क्योंकि अब केवल घोषणाओं, बैठकों और फोटो सेशन से विकास नहीं होने वाला — जनता को जमीन पर बदलाव चाहिए।

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