(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस | घुग्घुस पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले गड़चांदूर–चंद्रपुर मार्ग पर स्थित घुग्घुस टी-प्वाइंट (धानोरा फाटा) पर आज दोपहर करीब 3.30 बजे हुई भीषण सड़क दुर्घटना ने एक बार फिर यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नागरिकों के अनुसार यह हादसा सीधी-सीधी ओवरस्पीडिंग और मनमाने ढंग से वाहन चलाने का नतीजा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सीमेंट से भरा बलकर वाहन क्रमांक MP 11 ZD 0931 तेज रफ्तार में चलते हुए पहले वाहन क्रमांक MH 34 BV 8861 को पीछे से टक्कर मारकर मौके से भागने का प्रयास करता रहा। इसी दौरान धानोरा फाटा पर सड़क किनारे खड़ी गाड़ी क्रमांक MH 34 AA 0051 को जोरदार टक्कर मारते हुए बलकर अनियंत्रित हो गया और सड़क से कुछ ही दूरी पर स्थित एक बार्बर शॉप और चाय टपरी को रौंद डाला।
इस भयावह हादसे में बार्बर शॉप के मालिक शंकर जुनारकर की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि चाय टपरी पर मौजूद दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मृतक और घायल सभी घुग्घुस के निवासी बताए जा रहे हैं, जो रोज़ी-रोटी के लिए प्रतिदिन इसी मार्ग से आवाजाही करते थे।
घटना की खबर फैलते ही घुग्घुस और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग धानोरा फाटा पर जमा हो गए। स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर भारी वाहनों की तेज रफ्तार, नियमों की खुलेआम अनदेखी और पुलिस-प्रशासन की ढीली निगरानी लंबे समय से जानलेवा साबित हो रही है। इसके बावजूद न तो सख्त कार्रवाई होती है और न ही स्थायी सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं।
मृतक शंकर जुनारकर का शव चंद्रपुर स्थित शवविच्छेदन केंद्र भेज दिया गया है, जबकि दोनों घायलों को गंभीर हालत में चंद्रपुर रेफर किया गया है। खबर लिखे जाने तक पुलिस की ओर से विस्तृत जानकारी या ठोस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई थी।
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का परिणाम है। सवाल यह है कि कब तक निर्दोष लोग ओवरस्पीडिंग, लापरवाही और प्रशासनिक उदासीनता की कीमत अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे? क्या धानोरा फाटा जैसे संवेदनशील स्थानों पर सख्त ट्रैफिक नियंत्रण, स्पीड मॉनिटरिंग और भारी वाहनों पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे, या फिर अगली मौत का इंतज़ार किया जाएगा?




