PWD सड़कें बनीं कूड़ाघर, जवाबदेही से भागता प्रशासन
(प्रणयकुमार बंडी)
पडोली (चंद्रपुर) | पडोली ग्रामपंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली PWD की मुख्य सड़कें और सर्विस रोड आज विकास नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की शर्मनाक तस्वीर पेश कर रही हैं। पडोली–घुग्घूस, पडोली–चंद्रपुर और पडोली–नागपुर मार्ग पर सड़क के दोनों ओर कूड़ा-कचरा और वेस्ट मटेरियल के ढेर खुलेआम नजर आ रहे हैं। यह हालात किसी एक दिन के नहीं, बल्कि लंबे समय से चली आ रही अनदेखी का नतीजा हैं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि पडोली ग्रामपंचायत के सचिव, आजी–माजी सरपंच, उपसरपंच, पंचायत सदस्य, PWD के संबंधित अधिकारी और स्वच्छता विभाग आखिर अब तक क्या कर रहे थे? क्या उन्हें यह कचरा दिखाई नहीं देता, या फिर सब कुछ देखकर भी आंखें मूंद ली गई हैं?
स्वच्छ भारत की पोल खोलती जमीनी हकीकत
सरकारें मंचों से स्वच्छ भारत अभियान की सफलता के दावे करती हैं, लेकिन पडोली की सड़कों पर पसरा कचरा इन दावों की जमीनी सच्चाई उजागर करता है। सड़क किनारे जमा प्लास्टिक, निर्माण मलबा और घरेलू कचरा न सिर्फ यातायात में बाधा बन रहा है, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य संकट को भी न्योता दे रहा है।
स्थानीय नागरिकों और राहगीरों को:
दुर्गंध और गंदगी से गुजरना पड़ रहा है. मच्छर, मक्खी और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ रहा है. क्या यही “विकास” और “सुविधा” का मॉडल है?
PWD और ग्रामपंचायत की चुप्पी क्यों?
PWD की सड़कें कचरा डंपिंग यार्ड नहीं हैं, फिर भी खुलेआम वहां कूड़ा डाला जा रहा है। सवाल उठता है—
क्या PWD अधिकारियों ने कभी निरीक्षण किया? ग्रामपंचायत ने कचरा प्रबंधन की कोई ठोस व्यवस्था क्यों नहीं की? स्वच्छता विभाग की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों तक सीमित क्यों है? यह लापरवाही केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन से खिलवाड़ है।
जनहित की मांग: तुरंत कार्रवाई हो
अब केवल आश्वासन नहीं, तत्काल और कठोर कार्रवाई की जरूरत है:
सड़क किनारे जमा कचरे और वेस्ट मटेरियल की तुरंत सफाई, अवैध कचरा फेंकने वालों पर जुर्माना और कार्रवाई, नियमित निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था, ग्रामपंचायत, PWD और स्वच्छता विभाग की स्पष्ट जवाबदेही, यदि अब भी प्रशासन नहीं जागा, तो यह मुद्दा जनआंदोलन और उच्चस्तरीय शिकायत तक जाएगा—क्योंकि स्वच्छ वातावरण कोई एहसान नहीं, नागरिकों का मौलिक अधिकार है।
पडोली की सड़कें सवाल पूछ रही हैं—क्या जिम्मेदार जागेंगे, या कचरे के ढेर के नीचे जवाबदेही भी दब जाएगी?




