प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर: मानसून की दस्तक के साथ जहां किसान खेतों में जोताई और बुवाई के कार्यों में जुटे हुए हैं, वहीं घुग्घुस और आसपास के कई गांवों में डीजल की उपलब्धता को लेकर गंभीर समस्या सामने आ रही है। किसानों का आरोप है कि डीजल पंपों पर कैन में डीजल देने से इनकार किया जा रहा है, जिससे कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
किसानों के अनुसार खेतों में काम कर रहे ट्रैक्टरों का डीजल अचानक समाप्त हो जाने पर उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पहले किसान कैन में डीजल लेकर खेत तक पहुंच जाते थे, लेकिन अब कई पेट्रोल पंपों पर पांच लीटर डीजल तक कैन में देने से मना किया जा रहा है। इसके कारण खेतों के बीचों-बीच ट्रैक्टर बंद होकर खड़े हो रहे हैं और समय पर कृषि कार्य पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि वर्तमान समय खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बुवाई और जोताई में एक-दो दिन की देरी भी उत्पादन पर असर डाल सकती है। ऐसे में डीजल उपलब्ध नहीं होने या कैन में डीजल न मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसानों के सवालों का जवाब कौन देगा?
ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि डीजल केवल वाहन में ही भरना अनिवार्य है, तो खेत में बंद पड़े ट्रैक्टर या एयरलॉक होने के कारण स्टार्ट न होने वाले वाहन पेट्रोल पंप तक कैसे पहुंचेंगे? क्या डीजल पंप संचालक स्वयं खेतों तक जाकर डीजल उपलब्ध कराएंगे? या इसके लिए कोई विशेष सरकारी अनुमति अथवा आधिकारिक प्रक्रिया है?
किसानों का यह भी सवाल है कि यदि कैन में डीजल देना नियमों के विरुद्ध है, तो फिर कई स्थानों पर पिकअप, ड्रम और अन्य माध्यमों से डीजल ले जाने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? नियम केवल किसानों पर ही लागू किए जा रहे हैं या सभी के लिए समान हैं?
प्रशासनिक चुप्पी से बढ़ रहा असंतोष
किसानों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या पर न तो संबंधित विभाग कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर रहा है और न ही प्रशासन किसानों को राहत देने के लिए आगे आ रहा है। परिणामस्वरूप भ्रम और अव्यवस्था की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों और किसान संगठनों ने मांग की है कि कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए डीजल आपूर्ति को लेकर स्पष्ट नीति घोषित की जाए। खेतों में उपयोग के लिए किसानों को निर्धारित मात्रा में कैन के माध्यम से डीजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई जाए, ताकि खेती का काम प्रभावित न हो।
खेती का मौसम, लेकिन व्यवस्था बेपरवाह
एक ओर सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन में वृद्धि की बात करती है, वहीं दूसरी ओर खेती के सबसे महत्वपूर्ण मौसम में डीजल जैसी मूलभूत आवश्यकता की उपलब्धता पर संकट खड़ा होना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो इसका सीधा असर कृषि कार्यों और किसानों की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन और संबंधित विभाग किसानों की इस वास्तविक समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं, या फिर किसान यूं ही खेतों में बंद पड़े ट्रैक्टरों और अधूरे कृषि कार्यों के बीच परेशान होते रहेंगे।




