भाजपा का “मौज-मस्ती दौरा” आरोप, सत्ता पक्ष का पलटवार — मानहानि केस की तैयारी
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस नगर परिषद में नगरसेवकों के लिए आयोजित घनकचरा व्यवस्थापन प्रशिक्षण दौरे को लेकर अब राजनीतिक घमासान खुलकर सामने आ गया है। सत्ता पक्ष और भाजपा आमने-सामने आ गए हैं। एक ओर भाजपा नगरसेवक विवेक बोढे ने इसे “जनता के पैसों पर गोवा ट्रिप” करार दिया है, वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को “झूठा, भ्रामक और राजनीतिक स्टंट” बताते हुए मानहानि का दावा दाखल करने की तैयारी शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, शासन की ओर से नगर परिषद के नगरसेवकों को घनकचरा व्यवस्थापन संबंधी प्रशिक्षण के लिए गोवा अथवा जम्मू-कश्मीर भेजने का आदेश जारी हुआ था। दूरी अधिक होने के कारण सभी ने सामूहिक रूप से गोवा जाने का निर्णय लिया। इसके तहत 19 लोगों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था हेतु प्रति व्यक्ति लगभग 18,500 रुपये शासन स्तर पर जमा किए गए। नगर परिषद कार्यालय द्वारा करीब 3 लाख 70 हजार रुपये RTGS के माध्यम से भरने की जानकारी सामने आई है। हालांकि यात्रा खर्च संबंधित जनप्रतिनिधियों को स्वयं वहन करना था।
लेकिन अंतिम समय में भाजपा के कुछ नगरसेवकों ने प्रशिक्षण में जाने से इनकार कर दिया और नगर परिषद परिसर में आंदोलन छेड़ दिया। आंदोलन के दौरान भाजपा नगरसेवक विवेक बोढे ने आरोप लगाया कि “सड़क और नालों के विकास के पैसों से 20 लाख रुपये खर्च कर सत्ता पक्ष गोवा में जा रहा है।”
इन आरोपों के बाद बुधवार, 27 मई को नगर परिषद कार्यालय में मुख्याधिकारी निलेश रांजनकर की उपस्थिति में सत्ता पक्ष ने पत्रकार परिषद आयोजित कर भाजपा पर पलटवार किया। पत्रकार परिषद में शासन का आदेशपत्र, प्रशिक्षण से जुड़े दस्तावेज और भुगतान संबंधी कागजात प्रस्तुत किए गए। सत्ता पक्ष ने साफ कहा कि भाजपा जनता को गुमराह कर रही है और राजनीतिक लाभ के लिए तथ्य तोड़-मरोड़कर पेश किए जा रहे हैं।
इस अवसर पर नगराध्यक्ष दिप्ती सोनटक्के, उपाध्यक्ष राजु रेड्डी, स्वच्छता एवं स्वास्थ्य सभापति नुरूल सिद्दीकी, नगरसेवक दिलीप पिट्टलवार, नगरसेविका आशा गणेश पानघाटे, सुनीता पेंदोर, पल्लवी घुले, सूरज कन्नूर, तौफीक शेख तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
मुख्याधिकारी निलेश रांजनकर ने भी स्पष्ट किया कि इस मामले में टाउन प्लानिंग विभाग से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद जिन नगरसेवकों और नगरसेविकाओं का शुल्क जमा हुआ लेकिन वे प्रशिक्षण में नहीं गए, उनसे राशि की रिकवरी की जाएगी। साथ ही संबंधित लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।
दूसरी ओर भाजपा नेता व नगरसेवक विवेक बोढे अपने आरोपों पर कायम हैं। उन्होंने फोन पर कहा कि आंदोलन पूरी तरह सही था। उनका दावा है कि देश का नंबर-1 घनकचरा व्यवस्थापन मॉडल नागपुर में है, फिर प्रशिक्षण के लिए गोवा जाने की आवश्यकता क्या थी? उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह तकनीकी प्रशिक्षण था तो केवल संबंधित सभापति और समिति सदस्यों को ही भेजा जाना चाहिए था, अन्य लोगों को क्यों शामिल किया गया?
इस पूरे घटनाक्रम ने अब घुग्घुस की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। एक तरफ सत्ता पक्ष इसे शासन मान्य प्रशिक्षण बता रहा है, तो दूसरी तरफ भाजपा इसे “जनता के टैक्स के पैसों की फिजूलखर्ची” करार देकर मुद्दा गर्मा रही है। अब सबकी नजर टाउन प्लानिंग विभाग की रिपोर्ट और संभावित कार्रवाई पर टिक गई है।




