प्रणयकुमार बंडी
चंद्रपुर जिले के घुग्घुस नगर परिषद में नई राजनीतिक टीम के पदग्रहण को तीन महीने से अधिक समय बीत चुका है। विभिन्न पार्टियों के नगरसेवक, सभापति और नगराध्यक्ष ने बड़े-बड़े वादों और उम्मीदों के साथ सत्ता संभाली थी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
शहर में आज भी प्रदूषण, पेयजल संकट और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। आम नागरिकों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए नगर परिषद कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे जनता में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के समय किए गए वादे अब केवल भाषणों तक सीमित नजर आ रहे हैं। न तो सफाई व्यवस्था में सुधार हुआ है, न ही जलापूर्ति की स्थिति बेहतर हुई है। वहीं प्रदूषण की समस्या भी गंभीर रूप लेती जा रही है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या जनप्रतिनिधि इन गंभीर मुद्दों को सुलझाने में सक्षम हैं या फिर वे केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में उलझकर जनता का ध्यान भटकाते रहेंगे। नगर परिषद के भीतर भी आपसी खींचतान और राजनीतिक मतभेदों की चर्चा जोरों पर है, जिसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ रहा है।
जनता ने जिस विश्वास के साथ अपने प्रतिनिधियों को चुना था, अब वही विश्वास डगमगाता नजर आ रहा है। आने वाला समय यह तय करेगा कि यह जनादेश सही साबित होगा या फिर आम नागरिक एक बार फिर राजनीतिक खेल का शिकार बनेंगे।
फिलहाल घुग्घुस की जनता इंतजार में है—विकास के ठोस कदमों का, न कि केवल वादों और बयानबाजी का।




