(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस (चंद्रपुर) : शहर के मध्य स्थित मार्केट लाइन क्षेत्र का वर्षों पुराना तालाब आज अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। कभी स्थानीय नागरिकों के लिए जलस्रोत और पर्यावरण संतुलन का आधार रहा यह तालाब अब कथित रूप से मिट्टी भराव और उपेक्षा के कारण धीरे-धीरे लुप्त होता दिखाई दे रहा है।
इस तालाब के सौंदर्यीकरण और खोलीकरण (गहरीकरण) को लेकर बीते कई महीनों से सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों द्वारा लगातार आवाज उठाई जा रही है। इस संदर्भ में घुग्घुस नगर परिषद कार्यालय, जिलाधिकारी कार्यालय चंद्रपुर, यहां तक कि मुख्यमंत्री कार्यालय महाराष्ट्र को भी कई ज्ञापन सौंपे गए। बावजूद इसके अब तक तालाब मालिक को स्वच्छता, अतिक्रमण, खोलीकरण या अन्य किसी भी प्रकार की कार्रवाई संबंधी कोई ठोस नोटिस जारी नहीं किया गया है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस मामले में रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए हैं। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या प्रशासन और कुछ नेता तालाब मालिक के हित में कार्य कर रहे हैं?
मामला तब और गंभीर हो गया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथित रूप से पार्किंग के नाम पर तालाब में मिट्टी डाली जा रही है। यदि यह आरोप सत्य है, तो यह न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक संसाधन को निजी हित में परिवर्तित करने का प्रयास भी माना जा सकता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में तालाबों का संरक्षण जल स्तर बनाए रखने, वर्षा जल संचयन और तापमान संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में तालाब का भराव भविष्य में जल संकट और जलभराव जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है।
अब निगाहें नवनिर्वाचित नगर परिषद की नगराध्यक्ष, बंधकम सभापति, पानी पूर्वटा सभापति और अन्य संबंधित पदाधिकारियों पर टिकी हुई हैं। क्या वे इस मुद्दे को जनहित और पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से गंभीरता से लेंगे? या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
शहरवासियों की मांग है कि तालाब की तत्काल माप-जोख कराई जाए, अवैध मिट्टी भराव पर रोक लगे, और तालाब के सौंदर्यीकरण व खोलीकरण की पारदर्शी योजना बनाकर उसे अमल में लाया जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस वायरल वीडियो और लगातार दिए गए ज्ञापनों पर क्या कदम उठाता है। फिलहाल, मार्केट लाइन का यह तालाब राजनीति और जनहित के बीच संघर्ष का प्रतीक बनता जा रहा है।




