(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घूस, चंद्रपुर : 19 फरवरी 2026 को प्रयास सभागार, घुग्घूस में जनता विद्यालय के 1994-95 बैच का स्नेह सम्मेलन 32 वर्षों बाद अत्यंत उत्साह और भावनात्मक माहौल में संपन्न हुआ। पुरानी यादों को ताज़ा करते हुए और मित्रता के बंधनों को फिर से मजबूत बनाते हुए यह अविस्मरणीय क्षण सभी के दिलों में बस गया।
कार्यक्रम की शुरुआत जनता विद्यालय के गुरुवर्य तथा विधान परिषद सदस्य के हाथों दीप प्रज्वलन से हुई। इस अवसर पर अशोक बेलेकर (मुख्याध्यापक, जनता विद्यालय), डॉ. विजय हेलवटे, विनायक आसुटकर, दिलीप मोरे, दिलीप कापसे सर, अरुण गंधारे, मोहन गंधारे, पांडुरंग पिंपळकर, मारुति रावजी कूसपुरे, संजय पठाण, चंद्रशेखरजी बोबडे, के.वाय. कुटेमाटे, छाया बत्तूलवार और अनया पामपतुलवार की प्रमुख उपस्थिति रही।
दीप प्रज्वलन के बाद निलेश कापसे ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान प्रस्तुत कराया। इसके पश्चात दिवंगत गुरुजनों एवं साथियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। स्वागत गीत पुष्पा उरकुडे और उनके समूह द्वारा प्रस्तुत किया गया। स्नेह सम्मेलन का प्रारंभिक उद्बोधन सैमसन ने किया, जबकि पांडुरंग नांदे ने “शिवगर्जना” प्रस्तुत कर वातावरण को भावविभोर कर दिया।
मान्यवरों के मार्गदर्शनपूर्ण भाषणों ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया। विवेक बोड़े और पांडुरंग नांदे ने अपने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए मनोगत व्यक्त किया।
विशेष बात यह रही कि 1994-95 बैच के विद्यार्थी आज महाराष्ट्र सहित झारखंड, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में नौकरी व व्यवसाय कर रहे हैं, फिर भी समय निकालकर इस स्नेह सम्मेलन में शामिल हुए। विभिन्न राज्यों से आए पूर्व विद्यार्थियों की उपस्थिति कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही।
इस स्नेह सम्मेलन की तैयारी पिछले दो से तीन महीनों से चल रही थी। विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत विद्यार्थियों से संपर्क कर कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की गई। सैमसन रामटेके, विजय बावणे, कमलाकर चहारे, राजू परागे, श्याम कुमारवार, संदीप काकड़े, देवानंद रामटेके, प्रवीण देसाई, दीपा गादम, पुष्पा उरकुडे, अर्चना तिवारी, उज्ज्वला दुर्गे, एकता भोगेवार सहित सभी के अथक प्रयासों से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के दौरान सभी विद्यार्थियों को बचपन की यादों से जुड़ा एक स्मृति-चिन्ह भेंट किया गया। सुबह नाश्ते तथा दोपहर भोजन की उत्तम व्यवस्था की गई थी। अंत में श्याम कुमारवार ने आभार व्यक्त कर स्नेह सम्मेलन का समापन किया।
32 वर्षों बाद एक बार फिर साथ आकर मित्रता, स्मृतियों और गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाला यह आयोजन उपस्थित सभी लोगों के लिए जीवनभर यादगार रहने वाला क्षण बन गया।




