टाइगर की मौजूदगी से बढ़ा भय — लोगों ने उठाए सवाल
(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस (चंद्रपुर) — छठ पर्व के अवसर पर नकोडा स्थित वर्धा नदी घाट पर सोमवार को डूबते सूरज को अर्ध देने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए। वर्षों से परंपरागत रूप से आयोजित होने वाले इस पर्व में इस बार भय का माहौल देखने को मिला, क्योंकि क्षेत्र में बाघ (टाइगर) के देखे जाने की खबर ने व्रतियों और उनके परिजनों को चिंतित कर दिया था।
हालांकि, डर के माहौल के बावजूद भी छठ व्रतियों ने अटूट श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना संपन्न की। सोमवार को डूबते सूरज और मंगलवार को उगते सूरज को अर्ध देने के दौरान घुग्घुस पुलिस, वन विभाग और प्रशासन की टीमें मुस्तैद रहीं। सुरक्षा व्यवस्था के बीच भाविकों ने विधिवत रूप से सूर्य देव की उपासना की।
इस अवसर पर विविध राजनीतिक दलों के नेता और कार्यकर्ता भी घाट पर उपस्थित रहे और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। आयोजकों ने इन जनप्रतिनिधियों का स्वागत कर उनके सहयोग की सराहना की।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
घुग्घुस और आसपास के क्षेत्रों में हाल के दिनों में बाघों की बढ़ती आवाजाही और हमलों की घटनाओं ने लोगों के मन में भय उत्पन्न कर दिया है। श्रद्धालुओं के बीच चर्चा थी कि चंद्रपुर, यवतमाल और गढ़चिरोली जिलों में खुलेआम चल रही खदानें और पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन ही वन्यजीवों के गांवों और शहरों की ओर आने का मुख्य कारण बन रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया कि —
“क्या महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, वनमंत्री, चंद्रपुर और यवतमाल के पालकमंत्री तथा ग्रामीण व शहरी विकास मंत्री इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देंगे,
या फिर आम जनता को ऐसे ही भय और असुरक्षा में जीने के लिए छोड़ दिया जाएगा?”
लोगों का कहना है कि धार्मिक आस्था और जनजीवन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग और प्रशासन को स्थायी समाधान निकालना होगा। अन्यथा यह समस्या आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकती है।




