(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर – नगर परिषद घुग्घुस में वार्ड सीमांकन को लेकर उठी आवाज अब प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय नागरिक राजकुमार वर्मा और गणेश उईके द्वारा दी गई लिखित अर्जी ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि नगर परिषद में जनसंख्या संतुलन और मतदाता संख्या का कोई ठोस सर्वे नहीं किया गया है।
अर्जी के अनुसार, प्रभाग क्रमांक 5 में मात्र लगभग 1000 मतदाता हैं, जबकि प्रभाग क्रमांक 6 में मतदाताओं की संख्या कहीं अधिक है। इस असंतुलन के बावजूद नगर परिषद मौन है। सवाल यह उठता है कि आखिर सीमांकन करते समय प्रशासन ने किस आधार पर वार्डों का विभाजन किया? क्या यह कार्य सिर्फ कागजों पर पूरा कर लिया गया?
जनसंख्या का असमान वितरण न केवल लोकतांत्रिक संतुलन को प्रभावित करता है, बल्कि चुनावी निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। एक ओर नगर परिषद विकास योजनाओं और जनभागीदारी की बात करती है, वहीं दूसरी ओर वार्ड सीमांकन जैसे बुनियादी विषयों पर उदासीनता दिखा रही है।
राजकुमार वर्मा और गणेश उईके की मांग पूरी तरह तर्कसंगत है — यदि प्रभाग 6 के 1000 मतदाताओं को प्रभाग 5 में जोड़ा जाए, तो दोनों वार्डों में समानता और संतुलन स्थापित होगा। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या नगर परिषद इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी या फिर इसे भी “फाइलों में दबा मामला” बना देगी?
जनता अब जवाब चाहती है — आखिर वार्ड सीमांकन जनता के हित में है या किसी और के?




