Tuesday, May 26, 2026

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साहित्य अकादमी पुरस्कार 2025: मराठी लेखक राजू बाविस्कर सम्मानित, नई दिल्ली में भव्य समारोह

नई दिल्ली: द्वारा वर्ष 2025 के साहित्य अकादमी पुरस्कारों का वितरण आज राजधानी में आयोजित एक भव्य समारोह में किया गया। मराठी भाषा के लिए जळगांव के प्रसिद्ध चित्रकार और लेखक को उनकी आत्मकथा ‘काळ्यानिळ्या रेषा’ के लिए इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया। पुरस्कार स्वरूप उन्हें मानचिन्ह, शाल और एक लाख रुपये की राशि प्रदान की गई।

कमानी ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य अकादमी के अध्यक्ष ने राजू बाविस्कर को सम्मानित किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार और अकादमी के पूर्व अध्यक्ष , उपाध्यक्ष , संस्कृति मंत्रालय के निदेशक तथा अकादमी की सचिव सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

इस दौरान विश्वनाथ प्रसाद तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्यकारों को सम्मानित करना समाज की जिम्मेदारी है। यदि समाज रचनात्मकता का सम्मान नहीं करेगा तो वह मूल्यहीन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज को प्रेरणा और दिशा देता है, और लेखक अपने अनुभवों के माध्यम से कई जीवन जीता है। उन्होंने स्वतंत्रता-पूर्व काल में के साहित्य का उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार साहित्य ने सामाजिक आंदोलनों को दिशा दी।

अध्यक्ष माधव कौशिक ने पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया और उसके महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि सचिव पल्लवी होळकर ने कार्यक्रम का प्रास्ताविक प्रस्तुत किया और उपाध्यक्ष कुमुद शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

इस वर्ष साहित्य अकादमी पुरस्कार देश की 24 मान्यता प्राप्त भाषाओं में उत्कृष्ट साहित्यिक कृतियों के लिए दिए गए हैं। इनमें कविता, उपन्यास, कहानी, निबंध, समीक्षा और आत्मकथा जैसी विभिन्न विधाओं की कृतियों को विशेषज्ञ समिति द्वारा चयनित किया गया।

अन्य भाषाओं के पुरस्कार विजेता इस प्रकार हैं:

असमिया – देवव्रत दास

बांग्ला – प्रसून बंद्योपाध्याय

बोडो – सहायसुली ब्रह्म

डोगरी – खजूर सिंह ठाकुर

अंग्रेजी – नवतेज सरना

गुजराती – योगेश वैद्य

हिंदी – ममता कालिया

कन्नड़ – अमरेश नुगडोगी

कश्मीरी – अली शैदा

कोंकणी – एच. एम. पेरनाळ

मैथिली – महेंद्र झा

मलयालम – एन. प्रभाकरन

मणिपुरी – हाउबम नलिनी देवी

नेपाली – प्रकाश भट्टराई

ओडिया – गिरिजाकुमार बलियारसिंह

पंजाबी – हरजिंदर पाल ‘जिंदर’

राजस्थानी – जितेंद्र कुमार सोनी

संस्कृत – महामहोपाध्याय साधु भद्रेशदास

संताली – सुमित्रा सोरेन (मरणोपरांत)

सिंधी – भगवान अटलानी

तमिल – एस. तमिळसेलवन

तेलुगु – नंदिनी सिद्धरेड्डी

उर्दू – प्रितपाल सिंह बेताब


इस समारोह के माध्यम से देश की विविध भाषाओं और साहित्यिक परंपराओं को सम्मानित किया गया, जो भारतीय संस्कृति की समृद्धि और विविधता को दर्शाता है।

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Pranaykumar Bandi

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