(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस (चंद्रपुर) | शेनगांव हद में घुग्घुस–चंद्रपुर मुख्य मार्ग पर तीन गौवंश की संदिग्ध मौत ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैला दिया है। यह घटना न केवल अमानवीय कृत्य की ओर इशारा करती है, बल्कि प्रशासनिक सतर्कता और पशु सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब पांच बजे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को सूचना मिली कि शेनगांव हद में सड़क किनारे तीन गौवंश मृत अवस्था में पड़े हैं और उनके आसपास यूरिया रखा हुआ है। यह दृश्य किसी दुर्घटना का नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश का संकेत देता है। सूचना मिलते ही कार्यकर्ता तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर एक गौवंश जीवित अवस्था में मिला, जिसे तुरंत उपचार के लिए एक निजी फाउंडेशन के हवाले किया गया।
घटना की जानकारी घुग्घुस पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्पॉट पंचनामा किया। घटनास्थल से मिले यूरिया को जब्त कर लिया गया है और मामले की आगे की जांच घुग्घुस पुलिस द्वारा की जा रही है।
हालांकि, सवाल यह है कि अगर यह इलाका नियमित निगरानी में होता, तो क्या इस तरह की घटना संभव होती? सड़क किनारे खुलेआम गौवंश की मौत और पास में रासायनिक पदार्थ का पाया जाना प्रशासन की सुस्ती और गैर-जिम्मेदारी को उजागर करता है।
इस घटना की जानकारी मिलते ही पशु प्रेमियों और सामाजिक संगठनों में भारी नाराजगी देखने को मिली। उनका कहना है कि गौवंश की सुरक्षा केवल भाषणों और नारों तक सीमित रह गई है। जमीनी स्तर पर न तो निगरानी है, न ही दोषियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई।
पशु प्रेमियों ने मांग की है कि इस मामले को गंभीर अपराध मानते हुए दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, क्षेत्र में सीसीटीवी निगरानी, नियमित पेट्रोलिंग और आवारा पशुओं की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था की जाए।
यह घटना केवल तीन गौवंश की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज और व्यवस्था के संवेदनहीन चेहरे को उजागर करती है। अगर अब भी जिम्मेदार तंत्र नहीं जागा, तो ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी और हर बार प्रशासन जांच के नाम पर औपचारिकता निभाकर पल्ला झाड़ लेगा। जनता और पशु प्रेमी अब सिर्फ जांच नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं।




