मूर्तिकारों एवं गणेश मंडलों से नगर पालिका की अपील
ग्राहकों को मूर्तिकार से मिट्टी की मूर्ति की प्रमाणित रसीद लेनी होगी
पीओपी मूर्तियों पर रहेगी नगर पालिका की नजर
चंद्रपुर : पर्यावरण की रक्षा के लिए पिछले वर्ष से रमाला तालाब पर विसर्जन बंद कर दिया गया है और ईराई नदी के तट पर विसर्जन की व्यवस्था की गई है. इस स्थान पर पानी की गहराई 6 से 8 फीट तक हो सकती है, इसलिए मूर्तिकारों और गणेश मंडलों ने चंद्रपुर नगर निगम से विसर्जन स्थल की क्षमता के अनुसार गणेश मूर्तियों की ऊंचाई बनाए रखने की अपील की है.
चंद्रपुर शहर में गणेशोत्सव की तैयारियों को लेकर 28 जुलाई को नगर निगम सभागृह में विभिन्न विभागों के अधिकारियों व मूर्तिकारों की बैठक हुई. आयुक्त विपिन पालीवाल, अतिरिक्त आयुक्त चंदन पाटिल, उपायुक्त मंगेश खवले, उपायुक्त अशोक गराटे, पुलिस निरीक्षक सतीश सिंह राजपूत, सुजीत बंडीवार, सहायक आयुक्त नरेंद्र बोभाटे, राहुल पंचबुद्धे, डॉ. वनिता गार्गेलवार, डॉ. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि अमोल शेलके, नितिन रामटेके सहित सभी विभाग प्रमुख, कर्मचारी और मूर्तिकार प्रतिनिधि उपस्थित थे.
चंद्रपुर शहर में नागरिकों के सहयोग से पीओपी मूर्तियां बनाना, उपयोग करना और बेचना पूरी तरह से प्रतिबंधित है और 100 प्रतिशत पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव मनाया जाता है. हालांकि इस वर्ष भी प्रतिमाओं का निरीक्षण जोनवार टीमों द्वारा प्रत्यक्ष व गुप्त तरीके से किया जायेगा. मिट्टी की मूर्तियां बेचने वाले मूर्तिकारों और मूर्ति विक्रेताओं दोनों को नगर पालिका में पंजीकरण कराना आवश्यक है, बिना पंजीकरण के मूर्तियां बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. पंजीकरण संबंधित इलाके के जोनल कार्यालय में किया जाना चाहिए और यदि पीओपी मूर्तियों की बिक्री, आयात और निर्माण करते पाया गया तो दंडात्मक कार्रवाई के साथ मामला दर्ज किया जाएगा.
मूर्ति खरीदते समय ग्राहक को प्रमाणित रसीद लेनी चाहिए कि यह मिट्टी से बनी है तथा मूर्तिकार को संपर्क नंबर के साथ अपने हस्ताक्षर कर देना चाहिए. कमिश्नर विपिन पालीवाल ने सभी से इसमें शामिल होकर गणेशोत्सव खुशी से मनाने की अपील की है.




