(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस , चंद्रपुर : शहर के रिहायशी इलाकों में देर रात तक चल रहे बोरवेल कार्यों ने आम नागरिकों की नींद हराम कर दी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बोरवेल मालिक और उनके कर्मचारी रात के समय तेज़ आवाज़ में मशीनें चलाकर न केवल ध्वनि प्रदूषण फैला रहे हैं, बल्कि कानून व्यवस्था की खुली अवहेलना भी कर रहे हैं।
नागरिकों का कहना है कि दिनभर की मेहनत के बाद रात का समय विश्राम के लिए होता है, लेकिन बोरवेल मशीनों की कर्कश आवाज़ के कारण वे सो नहीं पा रहे हैं। इस स्थिति का सबसे अधिक दुष्प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों पर पड़ रहा है। बावजूद इसके संबंधित प्रशासन और पुलिस विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।
कानूनी दृष्टि से देखा जाए तो ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के तहत रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउड और अत्यधिक ध्वनि उत्पन्न करने वाली गतिविधियों पर स्पष्ट प्रतिबंध है। ऐसे में रात के समय बोरवेल संचालन न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
स्थानीय नागरिकों ने पुलिस गश्त की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि रात में पुलिस गश्त होती है, तो ऐसे खुलेआम नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? क्या इसमें किसी प्रकार की मिलीभगत है, या फिर पुलिस केवल शिकायत आने का इंतजार करती है?
लोगों का आरोप है कि पुलिस आम नागरिकों से पूछताछ में तत्पर रहती है, लेकिन प्रभावशाली लोगों द्वारा किए जा रहे इस तरह के उल्लंघनों पर आंखें मूंद लेती है। इससे कानून के समान अनुपालन पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हो रहा है।
नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि रात के समय बोरवेल संचालन पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और प्रभावित क्षेत्रों में नियमित निगरानी बढ़ाई जाए। अन्यथा, नागरिकों द्वारा सामूहिक आंदोलन की चेतावनी भी दी जा रही है।




