(प्रणयकुमार बंडी)
चंद्रपुर (घुग्घुस) – वेकोली वणी क्षेत्र की कामगार वसाहत सुभाषनगर और गांधीनगर में नाली सफाई अभियान पूर्व ग्राम पंचायत सदस्य महेश लट्टा की पहल पर चलाया जा रहा है। जबकि क्षेत्र की साफ-सफाई के लिए ठेकेदार नियुक्त है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब ठेकेदार मौजूद है, तो सफाई कार्य स्वयंसेवी स्तर पर क्यों कराना पड़ रहा है? क्या ठेकेदार केवल कागजों और यूनियन नेताओं तक ही सीमित है?
सूत्र बताते हैं कि मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए पांच ट्रेड यूनियन – HMS, BMS, आयटक, इंटक और सीटू – सक्रिय हैं। लेकिन क्या वाकई इनकी भूमिका जमीन पर दिखाई देती है? क्योंकि कॉलोनी की हालत कुछ और ही कहानी कहती है। जर्जर क्वार्टर्स, टूटी और जाम नालियां, पीने के पानी की किल्लत – ये समस्याएं आखिर कब हल होंगी?
यदि ठेकेदार समय पर और सही ढंग से काम कर रहा होता, तो कॉलोनीवासी इन समस्याओं से क्यों जूझते? क्या घुग्घुस नगर परिषद कार्यालय के अधिकारी इस ओर गंभीर हैं, या केवल कागजों तक ही सीमित हैं? जब ठेकेदार का बिल समय पर पास हो जाता है, तो क्या इसमें कमीशनखोरी की बू नहीं आती?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मजदूरों के जीवन से जुड़े मुद्दे लगातार अनदेखे किए जा रहे हैं, तो क्या यूनियनें केवल नाम भर की रह गई हैं? क्या सरकारी स्वास्थ्य विभाग इस गंदगी और अस्वस्थ माहौल पर ध्यान देगा, या फिर सबकी आंखें मूंद ली जाएंगी?
क्या यह पूरा मामला लापरवाही का है या फिर मिलीभगत का?
मजदूर कॉलोनी की समस्याओं का समाधान कब होगा?
जिम्मेदारी कौन तय करेगा – यूनियन, ठेकेदार, या प्रशासन?
यह सवाल अब सीधे कामगारों के सामने हैं और जवाब जिम्मेदारों को देना होगा।





