Sand crisis in Yavatmal and Chandrapur: Homemade construction stalled, general public upset
यवतमाल और चंद्रपुर जिले में रेत की भारी किल्लत ने आम जनता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. सरकार द्वारा चलाई जा रही महत्वाकांक्षी घरकुल योजना के तहत कई गरीब परिवारों को घरों की मंजूरी तो मिली, लेकिन रेत की अनुपलब्धता के कारण उनका निर्माण अटका हुआ है. हालात यह हैं कि जो रेत पहले ₹1000 में मिलती थी, वह अब ₹5000 से भी अधिक दामों पर मिल रही है. मजबूरी में आम नागरिकों को इस महंगी रेत को खरीदना पड़ रहा है, लेकिन सरकार, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
सरकार की अनदेखी और प्रशासन की उदासीनता
इस संकट पर स्थानीय नागरिकों में भारी नाराजगी है. नुक्कड़ और चौपालों पर होने वाली चर्चाओं में यह सवाल उठ रहा है कि सरकार आखिरकार चुप क्यों है? जनता का आरोप है कि मौजूदा सरकार चोरों और उद्योगपतियों की रक्षा कर रही है, जबकि आम जनता को उनके हक से वंचित किया जा रहा है. यह स्थिति न केवल सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि प्रशासन की निष्क्रियता को भी उजागर करती है.
अवैध रेत खनन और प्रशासन की भूमिका
रेत की किल्लत के पीछे कई सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय स्तर पर यह देखा गया है कि प्रशासन द्वारा अवैध रेत परिवहन करने वाले कुछ वाहन पकड़े जाते हैं, लेकिन कार्रवाई न के बराबर होती है. दूसरी ओर, रेत का अवैध भंडारण किया जा रहा है और इसे ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है. कई मामलों में, कंपनियों और उद्योगों को नियमों को ताक पर रखकर बड़ी मात्रा में रेत दी जा रही है, जबकि आम जनता को अपनी जरूरत के लिए रेत नहीं मिल रही.
रेत डिपो की स्थिति और भ्रष्टाचार के आरोप
सरकार ने रेत की किल्लत दूर करने के लिए डिपो से रेत उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी, लेकिन इसमें भी अनियमितताएं देखी जा रही हैं. डिपो से सही तरीके से रेत नहीं मिल रही है. लेकिन चोरों द्वारा इसे ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है. इससे स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक अधिकारी भी इस अवैध कारोबार में शामिल हो सकते हैं.
जनता की मांग: सरकार करे हस्तक्षेप
अब सवाल यह उठता है कि सरकार और प्रशासन इस समस्या का हल कब निकालेगा? क्या गरीबों के घर निर्माण का सपना अधूरा ही रह जाएगा? क्या रेत माफियाओं और उद्योगपतियों के हित आम जनता से ऊपर हैं? सरकार को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इस मुद्दे पर ध्यान दे, अवैध रेत खनन पर रोक लगाए और घरकुल योजना के तहत जरूरतमंदों को उचित दामों पर रेत उपलब्ध कराए. अन्यथा, जनता का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिल सकता है, जिससे सरकार और प्रशासन दोनों की साख दांव पर लग सकती है.




