चंद्रपुर (महाराष्ट्र): जिले की औद्योगिक नगरी घुग्घुस में इन दिनों पत्रकारों की भरमार हो गई है, लेकिन पत्रकारिता की मूल भावना और नैतिकता कहीं गुम होती दिख रही है। कुछ कथित पत्रकारों ने इस पेशे को समाज सेवा का माध्यम न मानते हुए इसे अवैध कमाई का जरिया बना लिया है। मीडिया की आड़ में अवैध उगाही और ब्लैकमेलिंग एक सुनियोजित धंधा बन गया है, जिससे आम जनता के साथ-साथ प्रशासन भी परेशान है।
अवैध धंधों से साठगांठ, फिर शुरू होती है वसूली
इन कथित पत्रकारों की मुख्य रणनीति पहले अवैध व्यवसायों पर नजर रखना, फिर उन्हें संरक्षण देने के नाम पर जबरन उगाही करना है। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो ये लोग धमकीभरी खबरें प्रकाशित कर संबंधित व्यवसायियों पर दबाव बनाते हैं। अवैध ट्रांसपोर्टिंग, अवैध खनन और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त लोगों से ये पत्रकार साठगांठ कर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं।
पत्रकारिता की गरिमा को पहुंचा रहे नुकसान
जहां कभी पत्रकारिता को समाज का चौथा स्तंभ माना जाता था, वहीं अब यह कुछ लोगों के लिए केवल धन उगाही का साधन बन गया है। पहले पत्रकार समाज की समस्याओं को उजागर कर न्याय दिलाने का कार्य करते थे, लेकिन अब कुछ स्वार्थी लोग इसे अपना निजी धंधा बना चुके हैं। इनके कारण पूरे पत्रकारिता क्षेत्र की छवि धूमिल हो रही है, जिससे सच्चे और ईमानदार पत्रकारों को भी संदेह की नजरों से देखा जाने लगा है।
क्षेत्र के लोग त्रस्त, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
घुग्घुस के नागरिक इन फर्जी पत्रकारों से परेशान हैं और शासन-प्रशासन से इन पर सख्त कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे कथित पत्रकारों की जांच करे और जो भी अवैध गतिविधियों में संलिप्त पाए जाएं, उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। पत्रकारिता की गरिमा बचाने के लिए यह कदम उठाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि समाज में भयमुक्त वातावरण बना रहे और सच्ची पत्रकारिता अपने वास्तविक स्वरूप में बनी रहे।




