Support for Buddhist Vihar: Pranaykumar Bandi Questions the Administration
भिक्खु रत्नमणि थेरो के आमरण उपोषण का किया समर्थन
रास्ता खोलने, कंपनी की NOC रद्द करने और विहार परिसर स्थायी रूप से विहार समिति को सौंपने की मांग;
प्रशासन से तत्काल निर्णय लेने की अपील
घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस के शांतिनगर स्थित बोधिसत्व बुद्ध विहार एवं ध्यान साधना केंद्र को लेकर चल रहा विवाद अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। अपनी प्रमुख मांगों को लेकर भिक्खु रत्नमणि थेरो द्वारा शुरू किए गए आमरण उपोषण को ब्रिथ ऑफ लाइफ मल्टीपरपज सोसाइटी, घुग्घुस के संस्थापक एवं अध्यक्ष प्रणयकुमार शंकर बंडी ने खुलकर समर्थन दिया है।
प्रणयकुमार ने 9 सितंबर 2026 को जारी समर्थन पत्र में कहा कि विहार के धार्मिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक महत्व को देखते हुए प्रशासन और संबंधित निजी कंपनी द्वारा अब तक कोई ठोस एवं समाधानकारक निर्णय नहीं लिया जाना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर न्यायसंगत निर्णय लेने की मांग की।

तीन प्रमुख मांगों पर अडिग विहार पक्ष
समर्थन पत्र में प्रणयकुमार ने भिक्खु रत्नमणि थेरो की तीन प्रमुख मांगों का पूर्ण समर्थन किया है। इनमें बौद्ध विहार के सामने का रास्ता विहार के उपयोग के लिए खुला एवं मुक्त करना, नगर परिषद द्वारा कंपनी को दी गई NOC तत्काल रद्द करना तथा बौद्ध विहार परिसर को स्थायी रूप से विहार समिति के सुपुर्द करना शामिल है।
प्रणयकुमार ने सवाल उठाया कि यदि किसी धार्मिक एवं सामाजिक स्थल से जुड़े विवाद का समाधान बातचीत और प्रशासनिक निर्णय से हो सकता है, तो मामले को उपोषण जैसी स्थिति तक पहुंचने की नौबत क्यों आई? प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह विवाद को लंबा खींचने के बजाय सभी पक्षों की बात सुनकर स्पष्ट और न्यायसंगत निर्णय ले।
‘प्रशासन तत्काल सकारात्मक निर्णय ले’
प्रणयकुमार ने कहा कि विहार परिसर केवल एक स्थान नहीं, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और ध्यान-साधना की गतिविधियों से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र है। इसलिए परिसर से संबंधित मूलभूत मांगों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि भिक्खु रत्नमणि थेरो की मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लिया जाए और आमरण उपोषण समाप्त कराने के लिए उचित कार्रवाई की जाए।
इस समर्थन के बाद शांतिनगर बुद्ध विहार का मुद्दा प्रशासन के लिए एक बार फिर गंभीर चुनौती बन गया है। अब देखना होगा कि संबंधित प्रशासन और नगर परिषद इस विवाद पर क्या ठोस कदम उठाते हैं।




