Tuesday, September 8, 2026

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बौद्ध विहार की मांगों पर प्रशासन की चुप्पी के खिलाफ आमरण उपोषण, समर्थन में उतरे नेता और सामाजिक कार्यकर्ता

Indefinite Hunger Strike Against Administrative Silence on Buddhist Vihar Demands; Leaders and Social Activists Extend Support

शांतिनगर बुद्ध विहार के सामने रास्ते, NOC रद्द करने और परिसर के स्थायी संरक्षण की मांग;

अधिकारियों की कथित निष्क्रियता पर उपोषण स्थल से उठे तीखे सवाल

प्रणयकुमार बंडी

घुग्घुस, जि. चंद्रपुर : घुग्घुस के शांतिनगर स्थित बोधिसत्व बुद्ध विहार एवं ध्यान साधना केंद्र से जुड़ा विवाद अब आमरण उपोषण तक पहुंच गया है। नगर परिषद एवं संबंधित स्टील कंपनी की ओर से मांगों पर अब तक कोई ठोस एवं समाधानकारक निर्णय नहीं लिए जाने का आरोप लगाते हुए भिक्खु रत्नमणि थेरो ने 7 सितंबर 2026 को दोपहर 3 बजे से विहार परिसर में आमरण उपोषण शुरू किया है।

विहार समिति की मांगों को लेकर प्रशासन की भूमिका पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। धार्मिक एवं सामाजिक महत्व वाले परिसर से जुड़ा मामला होने के बावजूद समाधान के लिए ठोस पहल क्यों नहीं हुई? संबंधित अधिकारियों और कंपनी की ओर से अब तक क्या कार्रवाई की गई? इन सवालों का जवाब उपोषण स्थल पर मौजूद लोगों द्वारा मांगा जा रहा है।

तीन प्रमुख मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई

आंदोलन से जुड़ी प्रमुख मांगों में बौद्ध विहार एवं परिसर के सामने का रोड विहार के उपयोग तथा आवागमन के लिए पूरी तरह खुला करना, नगर परिषद द्वारा संबंधित स्टील कंपनी को दी गई NOC तत्काल रद्द करना तथा बौद्ध विहार परिसर को स्थायी रूप से बौद्ध विहार समिति के संरक्षण एवं व्यवस्थापन हेतु सौंपना शामिल है।

समिति का कहना है कि ये मांगें केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था से जुड़ी नहीं हैं, बल्कि विहार परिसर के संरक्षण और बौद्ध समाज की धार्मिक भावनाओं से संबंधित हैं।

उपोषण स्थल से अधिकारियों पर तीखे सवाल

उपोषण स्थल पर मौजूद लोगों ने संबंधित अधिकारियों एवं कंपनी की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि यदि मांगों पर समय रहते गंभीरता से विचार किया गया होता, तो एक धार्मिक स्थल के परिसर में आमरण उपोषण जैसी स्थिति पैदा नहीं होती।

लोगों का सवाल है कि आखिर प्रशासन को निर्णय लेने के लिए आमरण उपोषण की नौबत आने का इंतजार क्यों करना पड़ा? क्या संबंधित विभागों के बीच समन्वय का अभाव है, या फिर इस मामले को लगातार नजरअंदाज किया गया?

हालांकि, इन आरोपों और सवालों पर संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों अथवा कंपनी की ओर से खबर लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

समर्थन में सामने आए महेश डोंगे

शिवसेना (शिंदे गट), घुग्घुस शहर प्रमुख महेश डोंगे ने भिक्खु रत्नमणि थेरो के आमरण उपोषण और विहार समिति की मांगों को अपना पूर्ण समर्थन दिया है। उन्होंने प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।

डोंगे ने विशेष रूप से विहार के सामने का रास्ता खुला करने, संबंधित NOC रद्द करने तथा विहार परिसर को समिति के संरक्षण एवं व्यवस्थापन हेतु प्रदान करने की मांग का समर्थन किया है।

युवासेना भी आंदोलन के समर्थन में

युवासेना (शिंदे गट), घुग्घुस शहर प्रमुख रोहन आगदारी ने भी आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए कहा कि धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व वाले विहार परिसर के संबंध में प्रशासन को संवेदनशीलता और तत्परता से निर्णय लेना चाहिए।

उन्होंने प्रशासन एवं संबंधित कंपनी से मामले का तत्काल संज्ञान लेकर ठोस निर्णय लेने का आग्रह किया।

सामाजिक कार्यकर्ता आशीष वनकर ने भी दिया समर्थन

सामाजिक कार्यकर्ता आशीष रामचंद्र वनकर ने भी भंते रत्नमणि थेरो के आमरण उपोषण का पूर्ण समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बौद्ध विहार केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि समाज के लिए आध्यात्मिक, सामाजिक एवं ध्यान-साधना का महत्वपूर्ण केंद्र है।

वनकर ने विहार परिसर की पवित्रता, सुरक्षा और भविष्य के संरक्षण को गंभीरता से लेने की मांग की तथा प्रशासन से सकारात्मक एवं त्वरित निर्णय लेने का आग्रह किया।

अब प्रशासन के सामने बड़ा सवाल

एक ओर भिक्खु रत्नमणि थेरो आमरण उपोषण पर बैठे हैं, वहीं दूसरी ओर विहार समिति की मांगों को राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल रहा है। ऐसे में अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वह बातचीत और समाधान का रास्ता अपनाएगा या फिर आंदोलन को और लंबा खिंचने देगा?

धार्मिक स्थल से जुड़े इस संवेदनशील मामले में यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन के और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

खबर लिखे जाने तक नगर परिषद, संबंधित स्टील कंपनी अथवा अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक जानकारी, निर्णय या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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