दो-तीन साल से लंबित सड़क कार्य से वाहन चालक परेशान, रोजाना लग रहा लंबा जाम; जनता बोली—टोल टैक्स वसूली पूरी तो सड़क सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस, चंद्रपुर: घुग्घूस-ताड़ाली मार्ग पर म्हातारदेवी गांव के रेलवे क्रॉसिंग के समीप सड़क का लगभग 150 से 200 मीटर हिस्सा पिछले दो-तीन वर्षों से लंबित बताया जा रहा है। सड़क के अधूरे कार्य और बदहाल स्थिति के कारण वाहन चालकों के साथ-साथ आसपास के गांवों से आने-जाने वाले नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इस मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। सड़क के लंबित हिस्से के कारण यातायात प्रभावित होने से कई बार लंबा जाम लगने की स्थिति बनती है। वाहन चालकों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि आखिर इतने लंबे समय से सड़क का यह छोटा-सा हिस्सा पूरा क्यों नहीं किया जा सका?
PWD की निगरानी पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि संबंधित PWD विभाग और जनप्रतिनिधियों की कथित अनदेखी के कारण सड़क का काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है। यदि कार्य तकनीकी, प्रशासकीय या ठेकेदारी संबंधी किसी कारण से रुका है, तो संबंधित विभाग को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
जनता का कहना है कि छोटी-सी समस्या का समय रहते समाधान किया जाए तो बड़े यातायात संकट को टाला जा सकता है। लेकिन लगातार देरी से नागरिकों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

ठेकेदार और अधिकारियों पर कार्रवाई कब?
सड़क निर्माण या मरम्मत कार्य के दौरान यदि निर्धारित नियमों, सुरक्षा मानकों अथवा यातायात प्रबंधन के प्रावधानों का पालन नहीं हो रहा है, तो संबंधित विभाग और पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह तत्काल निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करे।
स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि नियम आम नागरिकों के लिए हैं या निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होते हैं? यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?
रोड सेफ्टी के दावों पर जमीनी हकीकत भारी
सड़क सुरक्षा को लेकर सरकार और संबंधित मंत्री लगातार बड़े दावे करते रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर यदि महत्वपूर्ण मार्ग का एक हिस्सा वर्षों तक अधूरा रहता है और इसके कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है, तो इन दावों की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि जहां वाहन चालकों से टोल टैक्स की नियमित वसूली की जाती है, वहीं सड़क की स्थिति, पेट्रोलिंग, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी उतनी ही गंभीरता दिखाई जानी चाहिए। केवल टोल वसूली पर्याप्त नहीं, सुरक्षित और सुचारु सड़क उपलब्ध कराना भी व्यवस्था की जिम्मेदारी है।
जनता की सीधी मांग—काम पूरा करें या जिम्मेदारी तय करें
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि म्हातारदेवी रेलवे क्रॉसिंग के पास लंबित सड़क कार्य का तत्काल स्थल निरीक्षण कराया जाए और तकनीकी अथवा प्रशासनिक बाधाओं को दूर कर काम शीघ्र पूरा किया जाए।
यदि कार्य में अनावश्यक देरी, लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार अधिकारी, ठेकेदार अथवा संबंधित एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
जनता अब यह जानना चाहती है कि यह सड़क कब पूरी होगी और लंबे समय से चली आ रही परेशानी से कब राहत मिलेगी। सवाल सिर्फ 150-200 मीटर सड़क का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही, सड़क सुरक्षा और आम नागरिकों के अधिकारों का है।
जनता की उम्मीद साफ है—काम कागजों पर नहीं, सड़क पर दिखाई देना चाहिए।




