(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस, चंद्रपुर । महाराष्ट्र राज्य वीज वितरण कंपनी मर्यादित (महावितरण) के घुग्घुस वितरण केंद्र में सहायक अभियंता और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका व जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बकाया बिल के नाम पर बिना पूर्व नोटिस के कनेक्शन काटे जा रहे हैं, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि उपभोक्ता अधिकारों का खुला हनन भी।
क्या है सहायक अभियंता का कर्तव्य?
महावितरण कार्यालय में सहायक अभियंता का दायित्व केवल वसूली तक सीमित नहीं है।
उनकी जिम्मेदारी में— निर्बाध व सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना, उपभोक्ताओं की शिकायतों का समयबद्ध निवारण, बिलिंग, वसूली और कनेक्शन विच्छेदन की कानूनी प्रक्रिया का पालन, कर्मचारियों की निगरानी और जवाबदेही तय करना शामिल है। नियमों के अनुसार, किसी भी कार्रवाई से पहले उपभोक्ता को लिखित सूचना देना अनिवार्य है।
बिल न भरने पर नियम क्या कहते हैं?
विद्युत अधिनियम व महावितरण के प्रावधान स्पष्ट हैं— बकाया होने पर पूर्व नोटिस (डिमांड/डिसकनेक्शन नोटिस) देना अनिवार्य, नोटिस में निर्धारित समय-सीमा का उल्लेख, केवल नोटिस अवधि पूरी होने के बाद ही कनेक्शन विच्छेदन, उपभोक्ता को भुगतान/आपत्ति का अवसर, इसके बावजूद, घुग्घुस क्षेत्र में बिना नोटिस, अचानक बिजली काटने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
निवारण का अधिकार किसका?
उपभोक्ता—महावितरण कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज करा सकता है. उच्च अधिकारियों (कार्यकारी अभियंता/अधीक्षक अभियंता) से गुहार लगा सकता है. विद्युत लोकपाल/उपभोक्ता मंच में शिकायत कर सकता है. नियम विरुद्ध कटौती पर तत्काल पुनर्संयोजन की मांग कर सकता है.
नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई बनती है?
यदि अधिकारी या कर्मचारी मनमाने ढंग से बिना नोटिस बिजली काटते हैं, तो—विभागीय जांच, चेतावनी/निलंबन जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई, उपभोक्ता क्षतिपूर्ति का आदेश, सेवा नियमों के तहत दंड जैसी कार्रवाइयाँ संभव हैं। कानून किसी को भी नोटिस बाईपास कर दंडात्मक कार्रवाई की छूट नहीं देता।
तीखा सवाल: क्या घुग्घुस में नियम अलग हैं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या घुग्घुस वितरण केंद्र में कानून से ऊपर अधिकारी बैठ गए हैं? यदि नियम पुस्तिका मौजूद है, तो उसका पालन क्यों नहीं? क्या सहायक अभियंता और फील्ड स्टाफ को मनमानी की खुली छूट दी गई है?
महावितरण जैसी सार्वजनिक सेवा संस्था से जवाबदेही, पारदर्शिता और कानून का पालन अपेक्षित है। बिना नोटिस बिजली काटना न केवल अवैध है, बल्कि आम नागरिक को मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा है। अब समय है कि वरिष्ठ अधिकारी संज्ञान लें, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और उपभोक्ताओं का भरोसा बहाल किया जाए—वरना “सेवा” के नाम पर यह अत्याचार कब तक चलता रहेगा?




