नई दिल्ली : भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 अब भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए की जगह लेती है। यह धारा उन मामलों से संबंधित है, जिनमें किसी महिला के पति या पति के रिश्तेदार उसके साथ क्रूरता करते हैं।
कानून के तहत “क्रूरता” में मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न दोनों शामिल हैं। इसमें विशेष रूप से दहेज की मांग, प्रताड़ना, शारीरिक हमला, मानसिक यातना और महिला की आत्महत्या के लिए उकसाने जैसे कृत्य को गंभीर अपराध माना गया है।
धारा 85 के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को 3 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। इस धारा का उद्देश्य विवाह संस्था के भीतर महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करना है।
कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।





