आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया और वीडियो कॉलिंग प्लेटफॉर्म लोगों को जोड़ने का सबसे आसान साधन बन गए हैं। लेकिन यही साधन अब ठगों और साइबर अपराधियों के लिए लोगों को फँसाने का हथियार बनता जा रहा है। इन दिनों कई अज्ञात महिलाएं हनी ट्रैप के जरिए लोगों को अपने जाल में फँसाकर आर्थिक शोषण कर रही हैं।
कैसे फँसाया जाता है?
अपराधी सबसे पहले सोशल मीडिया पर फर्जी आईडी बनाते हैं। फिर अनजान लोगों से दोस्ती कर उनसे बातचीत शुरू करते हैं। धीरे-धीरे विश्वास जीतने के बाद वे वीडियो कॉलिंग के जरिए बातचीत करते हैं और उसी दौरान अश्लील वीडियो या फोटो रिकॉर्ड कर लेते हैं। इसके बाद पीड़ित को ब्लैकमेल करना शुरू कर देते हैं।
धमकी और ब्लैकमेलिंग
अगर पीड़ित उनकी मांग पूरी नहीं करता तो अपराधी धमकी देते हैं कि वे उनके वीडियो या फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड कर देंगे या उनके परिजनों और दोस्तों को भेज देंगे। डर और शर्मिंदगी के कारण कई लोग उनकी मांग मानकर पैसे भेज देते हैं।
गरीब से अमीर तक शिकार
चर्चाओं के अनुसार इस हनी ट्रैप का शिकार केवल गरीब या मध्यमवर्गीय लोग ही नहीं बल्कि कई संपन्न और उच्च वर्ग के लोग भी हुए हैं। कई मामलों में पीड़ित ने अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है, जबकि कुछ लोग अभी भी डर के साए में जी रहे हैं और खुलकर सामने आने से कतराते हैं।
पुलिस की भूमिका और सलाह
पुलिस का कहना है कि इस तरह की घटनाओं में डरने के बजाय तुरंत शिकायत करनी चाहिए। समय पर कदम उठाने से अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई संभव हो पाती है। साथ ही, साइबर विशेषज्ञों का सुझाव है कि:
अनजान लोगों से सोशल मीडिया पर दोस्ती न करें। वीडियो कॉलिंग के दौरान सावधानी बरतें। किसी भी तरह की धमकी मिलने पर तुरंत पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें।
हनी ट्रैप का यह जाल समाज के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। जागरूकता और सतर्कता ही इससे बचने का सबसे बड़ा उपाय है। लोगों को चाहिए कि वे सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी से करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
साइबर ठगी से खुद को और अन्य नागरिकों को सुरक्षित रखना चाहते हैं?
संचार साथी पोर्टल और मोबाइल ऐप आपको ऐसे ठगी वाले कॉल और मैसेज को आसानी से दर्ज करने में मदद करता है।
कृपया संचार साथी पोर्टल www.sancharsaathi.gov.in पर नोंद करें।
संचार साथी ऐप आज ही डाउनलोड करें
एंड्रॉइड: https://bit.ly/3ZR4H3P





