आज के दिन इतिहास में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया था। 21 अगस्त 1972 को लोकसभा में वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 पारित किया गया। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य देशभर में वन्य जीवों की घटती संख्या को बचाना और उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा करना था।
इस कानून के लागू होने के बाद शिकार पर कड़ी पाबंदी लगाई गई और कई दुर्लभ प्रजातियों को संरक्षित श्रेणी में रखा गया। साथ ही राष्ट्रीय उद्यानों, वन्य जीव अभयारण्यों और संरक्षित क्षेत्रों की स्थापना की गई। इस अधिनियम ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जनता को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई।
आज इस अधिनियम की बदौलत बाघ, हाथी, गैंडा और अन्य दुर्लभ प्रजातियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। यह कदम भारतीय जैव विविधता को बचाने और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र बनाए रखने में एक मील का पत्थर साबित हुआ।
यह अधिनियम आज भी देश के पर्यावरण संरक्षण की रीढ़ माना जाता है।





