Wednesday, April 29, 2026

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गणेश उत्सव: देश-विदेशों में मनाए जाने का कारण और इसका आरंभ

गणेश उत्सव भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है। गणपति बप्पा की पूजा विघ्नहर्ता, बुद्धि और समृद्धि के देवता के रूप में की जाती है। आज यह उत्सव विश्व स्तर पर भारतीय संस्कृति की पहचान बन चुका है।

गणेश उत्सव का मुख्य कारण

धार्मिक आस्था – भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन के बिना अधूरी मानी जाती है। यही कारण है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेशोत्सव मनाया जाता है।

सांस्कृतिक एकता – यह उत्सव समाज को जोड़ने का काम करता है। इसमें सभी जाति, वर्ग और धर्म के लोग एकत्र होकर भक्ति और उत्सव का आनंद लेते हैं।

सामाजिक उद्देश्य – स्वतंत्रता संग्राम के समय यह उत्सव जनजागरण और संगठन का माध्यम बना। आज भी यह समाज में एकता, भाईचारा और सहयोग की भावना जागृत करता है।

भारतीय संस्कृति का प्रसार – विदेशों में बसे भारतीय समुदाय इस पर्व को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और अगली पीढ़ी तक भारतीय परंपराओं को पहुंचाने के लिए मनाते हैं।

गणेश उत्सव की शुरुआत किसने की?

गणेश उत्सव प्राचीन काल से घर-घर में मनाया जाता था। लेकिन इसे सार्वजनिक और भव्य रूप से मनाने की शुरुआत लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में की।

उस समय अंग्रेजों ने बड़े सार्वजनिक जमावड़ों पर प्रतिबंध लगाया था।

तिलक ने गणेशोत्सव को सार्वजनिक रूप देकर जनता को एकत्रित होने और स्वतंत्रता आंदोलन के लिए जागरूक करने का मार्ग खोजा।

इस प्रकार गणेशोत्सव धार्मिक आस्था के साथ-साथ स्वतंत्रता संग्राम का सांस्कृतिक मंच भी बन गया।

विदेशों में गणेश उत्सव क्यों मनाया जाता है?

भारतीय प्रवासी समुदाय जहां-जहां गया, वहां गणेशोत्सव की परंपरा भी साथ गई।

अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मॉरीशस, फिजी, नेपाल, श्रीलंका, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया और खाड़ी देशों में गणेशोत्सव बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।

विदेशों में यह भारतीयों की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया है।

कई देशों में स्थानीय लोग भी इस उत्सव में भाग लेते हैं और भारतीय संस्कृति से जुड़ते हैं।

गणेश उत्सव का महत्व केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय है। लोकमान्य तिलक द्वारा इसे जनजागरण का स्वरूप देने के बाद यह पर्व एक आंदोलन और परंपरा बन गया। आज यह पर्व भारत के साथ-साथ विदेशों में भी भारतीय संस्कृति का दूत बनकर मनाया जाता है।

इस तरह, गणेशोत्सव का मुख्य कारण आस्था, एकता और सांस्कृतिक पहचान है, और इसकी सार्वजनिक शुरुआत लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने की थी।

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Pranaykumar Bandi

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