प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस (चंद्रपुर) — हिंदू धर्म में आषाढ़ी शुक्ल एकादशी, जिसे देवशयनी एकादशी कहा जाता है, का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी पावन अवसर पर शनिवार को घुग्घुस शहर में वारकरी भक्तों द्वारा पारंपरिक पालकी यात्रा निकाली गई। यह पालकी विठोबा-रुक्मिणी मंदिर, वडा संगम तक भक्ति भाव से पहुंचाई गई।
भक्तों ने कीर्तन, भजन और जयघोषों के साथ पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वारी के दौरान पारंपरिक पोशाक में सजे वारकरी श्री विट्ठल-रुक्मिणी के नाम गाते हुए पैदल यात्रा करते नज़र आए। नगर में जगह-जगह पालकी का पुष्पवर्षा, माला और आरती से स्वागत किया गया।
इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, राजनैतिक दलों और पुलिस प्रशासन की ओर से वारकरियों के लिए ठंडा पेयजल, फल वितरण और छाया की व्यवस्था की गई थी। भक्ति और सेवा का यह संगम पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता नज़र आया।
देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु के ‘योगनिद्रा’ में जाने की मान्यता है और इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ भी माना जाता है। इस दौरान विवाह, गृहप्रवेश जैसे मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। वारकरी संप्रदाय के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, और महाराष्ट्र में इसे विशेष श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।





