लाहौर (पुराना भारत/ब्रिटिश इंडिया) – कुश्ती की दुनिया में एक ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई है जिसमें रुस्तम-ए-हिंद इमाम बख़्श पहलवान अपने बच्चों के साथ दिखाई दे रहे हैं। इस दुर्लभ छवि में उनके सुपुत्र भोलू, गोगा, असलम, अकरम और नासिर पहलवान भी पहचान में आ रहे हैं, जो आगे चलकर हिंदुस्तान और पाकिस्तान की पहलवानी परंपरा के ध्वजवाहक बने।
इमाम बख़्श पहलवान, अपने समय के चोटी के पहलवानों में से एक थे और उन्हें यह गौरव भी प्राप्त था कि वे रुस्तम-ए-ज़मां द ग्रेट गामा पहलवान के सगे भाई थे। गामा पहलवान विश्वविजेता रहे और अपने संपूर्ण जीवनकाल में कभी कोई कुश्ती नहीं हारे, लेकिन उनके पीछे खड़ा था एक मजबूत परिवार — जिसमें इमाम बख़्श का स्थान बेहद सम्मानित था।
इमाम बख़्श की संतानें भी कुश्ती की दुनिया में मशहूर हुईं। खासकर भोलू पहलवान ने पाकिस्तान में ‘रुस्तम-ए-पाकिस्तान’ की उपाधि प्राप्त की और लंबे समय तक पहलवानी की परंपरा को जीवित रखा।
यह परिवार भारतीय उपमहाद्वीप में उस दौर का प्रतिनिधि था जब अखाड़ों में ताक़त, इज़्ज़त और परंपरा का बोलबाला था। इमाम बख़्श पहलवान की यह विरासत आज भी कुश्ती प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।




