Sunday, April 19, 2026

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घुग्घुस नगर परिषद का टेंडर हुआ ओपन, लेकिन पारदर्शिता पर उठे सवाल

घुग्घुस, चंद्रपुर | 25 जून 2025 को नगर परिषद, घुग्घुस द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-2026 के लिए साप्ताहिक बाजार और दैनिक गुजरी के संचालन हेतु जारी किया गया टेंडर बुधवार को औपचारिक रूप से खोला गया। इस प्रक्रिया में इच्छुक निविदाकारों ने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने आवेदन पत्र और आवश्यक दस्तावेज नगर परिषद कार्यालय में जमा किए।

नगर परिषद की ओर से जारी शर्तों के अनुसार, बोलीकर्ताओं के लिए कम से कम दो वर्षों का अनुभव प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य की छायाप्रति और निर्धारित निविदा शुल्क के साथ आवेदन करना अनिवार्य था।

बोली के लिए शुल्क निर्धारित किया गया था, जिसे सभी निविदाकारों ने समय पर जमा किया? सभी निविदाएँ स्वीकार की गईं और नियमानुसार टेंडर खोलने की प्रक्रिया नगर परिषद के मुख्य अधिकारी की उपस्थिति में संपन्न हुई। यह ठेका जुलाई 2025 से 31 मार्च 2026 तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान चयनित ठेकेदार को साप्ताहिक बाजार और दैनिक गुजरी के संचालन, व्यवस्थापन और शुल्क वसूली का अधिकार प्राप्त होगा।

नगर परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि ठेकेदार अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसका अनुबंध रद्द किया जा सकता है और उसे भविष्य की निविदा प्रक्रिया से वंचित किया जा सकता है।

पारदर्शिता पर उठ रहे हैं गंभीर सवाल

हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया से पहले संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के करीबी लोगों के बीच गुप्त बैठकों की जानकारी सामने आई है। इतना ही नहीं, अपोनेंट (विपक्षी) ठेकेदार के साथ भी कथित समझौता होने की चर्चा है, जिससे निष्पक्षता पर संदेह गहरा गया है।

इसके अलावा, एक और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि टेंडर निर्धारित समय से लगभग एक सप्ताह की देरी से खोला गया, जिससे प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह टेंडर ऑनलाइन आमंत्रित करना था, लेकिन अंततः इसे ऑफलाइन खोला गया, जिससे पारदर्शिता की धारणा को बड़ा झटका लगा है।

सूत्रों का कहना है कि इस निविदा प्रक्रिया में केवल दो ही आवेदन आए — एक पुराने ठेकेदार का और दूसरा एक नए ठेकेदार का, जिससे प्रतिस्पर्धा की वास्तविकता पर भी प्रश्न उठते हैं।

इस पूरे प्रकरण में कर विभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से बचते नजर आए, जिससे संदेह और भी गहरा हो गया है।

अब देखना यह होगा कि नगर परिषद इस टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निष्पक्ष जांच कराती है या यह मामला भी हमेशा की तरह औपचारिक जांच और फाइलों की खानापूर्ति तक ही सीमित रह जाएगा। जनता और स्थानीय व्यापारी वर्ग इस मामले की पारदर्शिता को लेकर चिंतित हैं और प्रशासन से स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।

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Pranaykumar Bandi

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