चंद्रपुर : 6 जून 2025 के दिन वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (WCL) द्वारा वर्धा नदी पर बनाए गए राफ्टर ब्रिज के कारण नदी का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है, जिससे आगामी मानसून में बाढ़ की स्थिति और संभावित जानमाल की हानि की आशंका जताई जा रही है। इस गंभीर मुद्दे पर घुग्घुस ग्राम पंचायत के पूर्व उपसरपंच सुधाकर गणपत बांदुरकर ने जिलाधिकारी को एक लिखित निवेदन सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
निवेदन में बताया गया है कि दिसंबर 2023 में मुंगोली-घुग्घुस मार्ग पर पुराने क्षतिग्रस्त पुल के स्थान पर WCL द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में राफ्टर ब्रिज का निर्माण किया गया था। इस ब्रिज को बनाए रखने के लिए बड़ी मात्रा में मिट्टी और होम पाइप नदी के बीच में डाले गए, जिससे वर्धा नदी का प्रवाह बाधित हो गया है। नदी में मिट्टी, कोयले की धूल और अन्य अपशिष्ट मिलने से जलप्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है।
पूर्व उपसरपंच बांदुरकर का कहना है कि इससे पूर्व बनाए गए राफ्टर ब्रिज भी कुछ ही दिनों में बह गए थे और अब फिर से अस्थायी निर्माण कर भारी कोयले की ढुलाई की जा रही है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। साथ ही यह स्थिति जलप्रदूषण नियंत्रण अधिनियम और पर्यावरण नियमों का भी उल्लंघन करती है।
बांदुरकर ने अपने निवेदन में चार प्रमुख मांगें रखी हैं:
नदी में डाली गई मिट्टी और राफ्टर ब्रिज को तुरंत हटाया जाए। वर्धा नदी का प्राकृतिक जलप्रवाह बहाल किया जाए। इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। संपूर्ण प्रकरण को जलसंपदा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण मंडल और राजस्व विभाग की शर्तों के तहत सुलझाया जाए।
इस संबंध में उन्होंने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जलसंपदा विभाग और WCL के प्रबंधक को भी प्रतिलिपि भेजी है।
स्थानीय नागरिकों में इस मुद्दे को लेकर रोष है और वे चाहते हैं कि प्रशासन इस गंभीर पर्यावरणीय और मानवीय संकट को जल्द से जल्द हल करे।




