Friday, June 5, 2026

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नए संसद भवन के दो वर्ष: एक लोकतांत्रिक यात्रा का लेखा-जोखा

29 मई 2023 को भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन का उद्घाटन किया। यह भवन न केवल वास्तुकला की दृष्टि से भव्य है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र की उन्नति और आधुनिकता का प्रतीक भी बन गया है। आज, जब नए संसद भवन को दो वर्ष पूर्ण हो चुके हैं, यह उचित समय है कि हम इसमें पारित प्रमुख कानूनों और इसकी भूमिका का विश्लेषण करें।

नए संसद भवन की विशेषताएँ


नए संसद भवन का निर्माण “सेंट्रल विस्टा परियोजना” के अंतर्गत किया गया था। इसमें आधुनिक तकनीकी सुविधाएँ, हरित निर्माण मानक, और अधिक स्थान की व्यवस्था है। त्रिकोणीय आकार वाला यह भवन लगभग 64,500 वर्ग मीटर में फैला हुआ है और इसमें लोकसभा और राज्यसभा के लिए व्यापक व आधुनिक कक्ष बनाए गए हैं।

पिछले दो वर्षों में पारित प्रमुख विधेयक

नए संसद भवन में कई ऐतिहासिक कानून पारित किए गए हैं। उनमें से कुछ प्रमुख कानून निम्नलिखित हैं:

नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023)

यह महिला आरक्षण विधेयक था, जिसे दशकों की प्रतीक्षा के बाद पारित किया गया। इसके अंतर्गत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया गया है।

यह कानून महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना गया।

नए आपराधिक कानून (2023-24)

भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), और साक्ष्य अधिनियम को बदलते हुए तीन नए कानून लाए गए:

भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागर सुरक्षा संहिता (BNSS), भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA).

इनका उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, त्वरित और पीड़ित-केंद्रित बनाना है।

डिजिटल पर्सनल डेटा संरक्षण अधिनियम (2023)

यह कानून नागरिकों के डेटा की सुरक्षा के लिए लाया गया, जो डिजिटल युग में निजता के अधिकार को संरक्षित करता है।

अन्य महत्वपूर्ण कानून

रेलवे सुरक्षा विधेयक, उर्जा सुधार अधिनियम, गिग वर्कर्स कल्याण योजना विधेयक, राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संबंधित संशोधन.

संसद में नई संस्कृति और तकनीक
नए भवन में डिजिटल वोटिंग प्रणाली, पेपरलेस कार्यप्रणाली, और बैठकों के लाइव ट्रांसमिशन जैसी व्यवस्थाएँ की गईं। इससे कार्यकुशलता में वृद्धि हुई और पारदर्शिता भी बढ़ी।

आलोचना और बहस

जहाँ एक ओर नए संसद भवन की भव्यता और आधुनिकता की सराहना हुई, वहीं दूसरी ओर इसकी लागत, उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति को आमंत्रित न किए जाने जैसे मुद्दों को लेकर राजनीतिक बहस भी हुई।

नया संसद भवन केवल एक ईंट और पत्थर की संरचना नहीं है, यह भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों, बहस, संवाद और विविधता का जीवंत प्रतीक बन चुका है। बीते दो वर्षों में इसमें जो कानून पारित हुए हैं, वे देश के भविष्य को दिशा देने वाले साबित हो सकते हैं। आने वाले वर्षों में यह भवन न केवल विधायी कार्यों का केंद्र बना रहेगा, बल्कि नए भारत की आकांक्षाओं का मंच भी बनेगा।

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Pranaykumar Bandi

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