Wednesday, April 29, 2026

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पर्यटन स्थलों और झरनों पर दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जिला कलेक्टर के निर्देश

District Collector instructions to prevent accidents at tourist destinations and springs

 

नागरिकों से सतर्क रहने की प्रशासन की अपील

चंद्रपुर :

जिले में कई पर्यटन स्थल और झरने हैं, जहां विशेष रूप से मानसून के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं. इन स्थानों पर किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना न हो और जान-माल की हानि को रोका जा सके, इसके लिए सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रतिबंधात्मक उपाय किए जाएं. इस संबंध में जिला कलेक्टर एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष विनय गौड़ा जी.सी. ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं. साथ ही, नागरिकों से भी सतर्क रहने की अपील की गई है.

 

जिला कलेक्टर द्वारा दिए गए निर्देश:

1️⃣ सुरक्षा जांच और चेतावनी बोर्ड:

जिले के नदी, तालाब, बांध, झरने, किले, जंगल आदि पर्यटन स्थलों का महाराष्ट्र पर्यटन विकास महामंडल, वन विभाग, पुरातत्व विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा निरीक्षण किया जाए.

झरने, तालाब, नदियों और पहाड़ियों के खतरनाक किनारों पर नियंत्रण रेखा निर्धारित की जाए.

इन क्षेत्रों को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं.

 

2️⃣ खतरनाक पर्यटन स्थलों को बंद करना:

जिन पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाना संभव नहीं है, उन्हें पर्यटकों के लिए बंद किया जाए.

झरनों, पहाड़ी किनारों, जलाशयों और नालों को पर्यटकों के लिए अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जाए.

 

3️⃣ सुरक्षा सुविधाओं की उपलब्धता:

जल पर्यटन स्थलों पर लाइफ जैकेट, लाइफ बॉय, रेस्क्यू बोट, प्रशिक्षित गोताखोर और बचाव दल की तैनाती की जाए.

पर्यटन स्थलों पर “क्या करें और क्या न करें” से संबंधित सूचना बोर्ड लगाए जाएं.

प्रशासनिक विभागों को अपने क्षेत्र में आपातकालीन बचाव दल और सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी.

 

4️⃣ गिर्यारोहण और जल पर्यटन में सतर्कता:

ट्रेकिंग और जल पर्यटन स्थलों पर स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों, प्रशिक्षित आपदा मित्रों और बचावकर्मियों की सहायता ली जाए.

इन स्थलों पर प्राथमिक उपचार सुविधा और एंबुलेंस की व्यवस्था होनी चाहिए.

उप-विभागीय दंडाधिकारी अपने क्षेत्र में आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के रूप में कार्य करें और आवश्यकता पड़ने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत आदेश जारी करें.

 

5️⃣ यातायात और सड़क सुरक्षा:

पर्यटन स्थलों पर अत्यधिक वाहनों के कारण ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की संभावना रहती है.

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल, सार्वजनिक निर्माण विभाग और जिला परिषद को सड़कों की मरम्मत, स्पीड ब्रेकर, दिशा-निर्देश संकेत और ट्रैफिक नियंत्रण उपाय करने होंगे.

 

6️⃣ स्थानीय गाइड, टैक्सी चालक और होटल व्यवसायियों को शामिल करना:

होटल मालिकों, टैक्सी/ऑटो चालक संघ, टूर गाइड और स्वयंसेवी संगठनों को सुरक्षा उपायों में शामिल किया जाए.

इन संगठनों के माध्यम से पर्यटकों को सुरक्षित यात्रा के लिए जागरूक किया जाए.

पार्किंग और वाहनों के सीमित उपयोग पर उचित दिशा-निर्देश दिए जाएं.

 

7️⃣ पर्यटन स्थलों पर अनुशासन और सुरक्षा नियम:

पर्यटन जिला विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन “सुरक्षित और जिम्मेदार पर्यटन” सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है.

विशेष रूप से जंगलों में स्थित पर्यटन स्थलों पर वन विभाग को असुरक्षित स्थानों को मानसून के दौरान अस्थायी रूप से बंद करने के निर्देश दिए गए हैं.

जहां पर्यटन जारी रहेगा, वहां सुरक्षा संबंधी चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं.

सूर्यास्त के बाद पर्यटकों को उन स्थानों पर रुकने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

 

सख्त कार्रवाई के निर्देश:

संबंधित विभागों और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन उपायों को सख्ती से लागू करें.

यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारी और विभाग प्रमुख उत्तरदायी माने जाएंगे.

जिला प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा नियमों का पालन करें और सतर्क रहें, जिससे किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके.

 

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Pranaykumar Bandi

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