चंद्रपुर:
हाल ही में चंद्रपुर थर्मल पावर स्टेशन (सीटीपीएस) में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के वायुवेग पथक द्वारा की गई सख्त जांच के बाद अब घुग्घुस और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में भी कार्रवाई की संभावना को लेकर चर्चा तेज हो गई है. सीटीपीएस परिसर के पिछले हिस्से में स्थित शेड क्षेत्र में किए गए निरीक्षण में 13 टिप्पर वाहनों पर नियमों के उल्लंघन के आरोप में कार्रवाई की गई थी.
औद्योगिक क्षेत्रों में कड़ी नजर
इस कार्रवाई के बाद अब यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वायुवेग पथक जल्द ही घुग्घुस, आसपास के गांवों, फाटा पर निर्माणाधीन पुलिया, स्टील कंपनी, सीमेंट कंपनी, कोल डिपो, कोल वाशरी और खुली खदानों में भी इसी प्रकार का औचक निरीक्षण कर सकता है. क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही, सुरक्षा नियमों की अनदेखी, ओवरलोडिंग और अन्य नियम उल्लंघनों को देखते हुए केंद्रीय मोटर वाहन नियम 138 और मोटर वाहन अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है.
परिवहन विभाग की सख्ती से वाहन मालिकों में हड़कंप
वायुवेग पथक की संभावित कार्रवाई को लेकर वाहन मालिकों और कंपनियों में हड़कंप मच गया है. कई कंपनियां अब अपने वाहनों के दस्तावेजों को दुरुस्त करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही हैं. औद्योगिक क्षेत्र में बड़े पैमाने पर भारी वाहनों का संचालन होता है, और कई बार नियमों की अनदेखी की जाती है, जिससे न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है बल्कि पर्यावरण और सड़क सुरक्षा को भी नुकसान पहुंचता है.
वायुवेग पथक की रणनीति
सूत्रों के अनुसार, परिवहन विभाग अब औद्योगिक क्षेत्रों में ट्रकों, टिप्पर और अन्य भारी वाहनों की सख्ती से जांच करने की योजना बना रहा है. विशेष रूप से उन वाहनों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जो बिना वैध परमिट, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा या आवश्यक सुरक्षा मानकों के बिना परिचालन कर रहे हैं.
क्षेत्र में बढ़ी चर्चा
सीटीपीएस में हुई हालिया कार्रवाई के बाद घुग्घुस और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में दबी जुबान में चर्चा चल रही है कि अगला निशाना कौन होगा? स्थानीय ट्रांसपोर्टर और खनन क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच यह आशंका बढ़ गई है कि किसी भी समय वायुवेग पथक का छापा पड़ सकता है.
क्या होगा आगे?
अगर वायुवेग पथक औद्योगिक क्षेत्रों में कार्रवाई करता है, तो यह निश्चित रूप से सड़क सुरक्षा और परिवहन नियमों को लागू करने में एक बड़ा कदम होगा. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वाहन मालिक और कंपनियां समय रहते आवश्यक सुधार करती हैं या फिर उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.




