दिल्ली : 18वीं लोकसभा के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू होने में कुछ घंटे से भी कम समय बचा है, ऐसे में सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर जनमत सर्वेक्षण कराए जा रहे हैं. यह केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा दिये गये निर्देशों का उल्लंघन है. इस उल्लंघन को देखते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ओपिनियन पोल और एग्जिट पोल पर पूरी तरह से प्रतिबंध है.
पिछले कुछ दिनों से लोकसभा चुनाव को लेकर भविष्यवाणियां की जा रही हैं. कुछ न्यूज चैनलों ने भी ये सर्वे कराया है. यह जनमत सर्वेक्षण सोशल मीडिया पर चल रहा है और कई पार्टी के नेता व्हाट्सएप, एक्स, फेसबुक की मदद से लोगों को प्रभावित करने के लिए अपने सुविधाजनक जनमत सर्वेक्षण का उपयोग कर रहे हैं.
यह केंद्रीय चुनाव आयोग के निर्देशों का खुला उल्लंघन है. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के अनुसार जनमत सर्वेक्षण एवं मतदान उपरांत परीक्षणों के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं.
इस निर्देश के मुताबिक, एग्जिट पोल की घोषणा सभी चरणों की मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद की जा सकती है. 18वीं लोकसभा के लिए मतदान प्रक्रिया 19 अप्रैल से शुरू हो रही है. इसका मतलब है कि जनमत सर्वेक्षण 17 अप्रैल को बंद हो जाना चाहिए, जबकि एग्जिट पोल के नतीजे 1 जून को शाम 6:30 बजे के बाद घोषित किए जाने है.
ज्यादातर ओपिनियन पोल बीजेपी को ज्यादा समर्थन दिखा रहे हैं. इस बात को लेकर भी भ्रम है कि क्या ये सर्वे जानबूझकर किए जा रहे हैं. केंद्रीय चुनाव आयोग ने अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है लेकिन आज आयोग ने निर्देश जारी कर दिये हैं. इसमें रेडियो, न्यूज ब्यूरो, मीडिया हाउस और टेलीविजन चैनलों को निर्देश दिए गए हैं. ऐसे सर्वेक्षणों का उपयोग मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए किया जाना पाया गया. इस प्रकार इन निर्देशों में जनमत सर्वेक्षण पूर्णतया प्रतिबंधित है.




