शिकायत के बाद नगरसेवक-नगरसेविका की भूमिका पर उठे सवाल; कार्रवाई होगी या शिकायत फाइलों में दब जाएगी?
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस, चंद्रपुर : घुग्घूस नगरपरिषद क्षेत्र के अमराई, प्रभाग क्रमांक 11 स्थित ‘पंचशील झेंडा ओपन स्पेस’ में कथित रूप से हो रहे अनधिकृत व्यावसायिक वाहन पार्किंग और अतिक्रमण को लेकर अब स्थानीय स्तर पर सवाल उठने लगे हैं। आम आदमी पार्टी के घुग्घूस अध्यक्ष विकास खाडे ने नगरपरिषद के मुख्याधिकारी को शिकायत देकर इस समस्या पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के साथ घटनास्थल की स्थिति और GPS लोकेशन दर्शाने वाले फोटो भी संलग्न किए जाने की जानकारी दी गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगरपरिषद की सार्वजनिक मोकळी जागा में ‘छोटा हाथी’, मालवाहक वाहनों सहित अन्य निजी वाहन नियमित रूप से खड़े किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, वाहनों की सफाई और मरम्मत भी इसी परिसर में किए जाने का दावा शिकायतकर्ता की ओर से किया गया है। इसके कारण नागरिकों के उपयोग की जगह प्रभावित होने के साथ परिसर की व्यवस्था और आवागमन पर भी सवाल उठाए गए हैं।
सार्वजनिक जगह आखिर किसके लिए?
पंचशील झेंडा परिसर में सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े प्रतीक मौजूद होने के बावजूद यदि वहां व्यावसायिक वाहनों की पार्किंग लगातार होती है, तो नगरपरिषद की सार्वजनिक जगहों के नियोजन और संरक्षण पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
शिकायत में कहा गया है कि पार्क किए गए वाहनों के कारण बच्चों के खेलने, बुजुर्गों के बैठने और नागरिकों के आवागमन के लिए उपलब्ध जगह प्रभावित हो रही है। परिसर के प्रवेश मार्ग और आसपास वाहन खड़े रहने से पैदल चलने वाले नागरिकों तथा स्कूली बच्चों को भी परेशानी होने का दावा किया गया है।

अब नजर नगरसेवक और नगरसेविका की भूमिका पर
शिकायत सामने आने के बाद प्रभाग में एक और चर्चा शुरू हो गई है—क्या स्थानीय नगरसेवक और नगरसेविका इस समस्या के समाधान के लिए प्रशासन के साथ प्रभावी पहल करेंगे?
स्थानीय नागरिकों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि शिकायत पर वास्तव में स्थल निरीक्षण होगा या मामला अन्य शिकायतों की तरह केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा। नगरपरिषद प्रशासन की ओर से इस शिकायत पर अब तक क्या कदम उठाए गए हैं, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
पार्किंग हटेगी तो वाहन कहां खड़े होंगे?
मामले का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि नगरपरिषद सार्वजनिक ओपन स्पेस से व्यावसायिक वाहनों की पार्किंग हटाती है, तो क्या प्रशासन और जनप्रतिनिधि वैकल्पिक पार्किंग व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में कोई योजना बनाएंगे?
स्थानीय स्तर पर सवाल है कि समस्या का समाधान केवल वाहनों को हटाने तक सीमित रहेगा या नगरपरिषद शहर में व्यावसायिक एवं मालवाहक वाहनों के लिए नियोजित पार्किंग व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार करेगी?
क्योंकि एक ओर सार्वजनिक मोकळी जागा को अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग से बचाना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर वाहन मालिकों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का सवाल भी प्रशासन के सामने है।

शिकायत के बाद अब कार्रवाई का इंतजार
पंचशील झेंडा ओपन स्पेस को लेकर सामने आई शिकायत ने नगरपरिषद की सार्वजनिक संपत्ति, पार्किंग नियोजन और अतिक्रमण नियंत्रण व्यवस्था पर चर्चा छेड़ दी है।
अब देखना यह होगा कि मुख्याधिकारी कार्यालय इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है, संबंधित वाहन चालकों के खिलाफ नियमों के तहत कोई कदम उठाया जाता है या नहीं, तथा प्रभाग के निर्वाचित प्रतिनिधि इस मुद्दे को नगरपरिषद के स्तर पर किस तरह उठाते हैं।
सवाल कई हैं—पंचशील झेंडा ओपन स्पेस से अनधिकृत पार्किंग हटेगी? ‘नो पार्किंग’ के फलक लगाए जाएंगे? कार्रवाई होगी? और यदि व्यावसायिक वाहनों को हटाया जाता है तो उनके लिए वैकल्पिक पार्किंग व्यवस्था कौन करेगा?
इन सवालों के जवाब अब नगरपरिषद प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की अगली कार्रवाई से मिलने की प्रतीक्षा है।




