Administration Silent on Buddha Vihar Demands; Rahul Ghotekar Visits Hunger Strike Site on Fifth Day
ठोस निर्णय के अभाव में आमरण उपोषण जारी; सांसद के माध्यम से नगर परिषद और कलेक्टर के साथ बैठक कराने का आश्वासन
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस के शांतिनगर स्थित बोधिसत्व बुद्ध विहार एवं ध्यान साधना केंद्र से जुड़ी मांगों को लेकर भिक्खु रत्नमणि थेरो का आमरण उपोषण पांचवें दिन भी जारी है। 7 सितंबर 2026 से शुरू हुए इस आंदोलन को पांच दिन बीत जाने के बावजूद नगर परिषद और संबंधित कंपनी की ओर से मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं होने से आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
आंदोलन के पांचवें दिन चंद्रपुर महानगरपालिका के सदस्य राहुल घोटेकर उपोषण स्थल पर पहुंचे। उन्होंने भिक्खु रत्नमणि थेरो से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य और आंदोलन की स्थिति के बारे में जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि वे सांसद से चर्चा कर नगर परिषद तथा कलेक्टर मैडम के साथ बैठक आयोजित करवाने और इस पूरे विषय का समाधान निकालने का प्रयास करेंगे।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक धार्मिक एवं सामाजिक परिसर से जुड़ी मांगों के समाधान के लिए किसी जनप्रतिनिधि को सांसद के माध्यम से बैठक कराने की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या स्थानीय प्रशासन के पास नागरिकों और आंदोलनकारियों की बात सुनकर समाधान निकालने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है?
तीन प्रमुख मांगों पर अटका मामला
भिक्खु रत्नमणि थेरो द्वारा उठाई जा रही प्रमुख मांगों में बौद्ध विहार के सामने का रास्ता विहार के उपयोग के लिए खुला किया जाना, नगर परिषद द्वारा कंपनी को दी गई NOC रद्द करना, तथा बौद्ध विहार परिसर को स्थायी रूप से विहार समिति को सौंपना शामिल है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि ये मांगें केवल किसी एक व्यक्ति या समिति का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि विहार परिसर, श्रद्धालुओं, सामाजिक गतिविधियों और स्थानीय नागरिकों के अधिकारों से जुड़ा विषय है।
पांच दिन बाद भी प्रशासनिक चुप्पी क्यों?
आमरण उपोषण का पांचवां दिन पूरा हो चुका है। इसके बावजूद यदि संबंधित प्रशासन और कंपनी की ओर से कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आता, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि क्या आंदोलनकारियों को अपनी मांगों के लिए अपनी जान जोखिम में डालने तक इंतजार करना पड़ेगा?
प्रशासन के सामने अब केवल बैठक का आश्वासन नहीं, बल्कि समयबद्ध और स्पष्ट निर्णय देने की चुनौती है। आंदोलन लंबा खिंचने की स्थिति में भिक्खु रत्नमणि थेरो के स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा हो सकती है।
जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में
विहार विवाद को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले से ही नाराजगी दिखाई दे रही है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की जिम्मेदारी केवल आंदोलन स्थल पर पहुंचकर हालचाल पूछने तक सीमित नहीं रह सकती। जरूरत इस बात की है कि संबंधित पक्षों को एक साथ बैठाकर दस्तावेजों, NOC, रास्ते और विहार परिसर के अधिकार से जुड़े सभी मुद्दों पर पारदर्शी तरीके से निर्णय लिया जाए।
अब देखना यह है कि राहुल घोटेकर द्वारा सांसद के माध्यम से बैठक कराने का आश्वासन कितनी जल्दी अमल में आता है और क्या इस बैठक से वर्षों से चले आ रहे विवाद का कोई ठोस समाधान निकलता है।
फिलहाल भिक्खु रत्नमणि थेरो का आमरण उपोषण जारी है और शांतिनगर की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।




