निजी कंपनी (…मेटल कंपनी) अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : जमीन से जुड़े विवाद को लेकर एक 56 वर्षीय किसान को कथित तौर पर धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में घुग्घुस पुलिस स्टेशन में NCR क्रमांक …./2026 दर्ज किया गया है। पुलिस दस्तावेज के अनुसार मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(2) के तहत दर्ज किया गया है। यह धारा आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) से संबंधित है।
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, मोहनदास धोंडूजी राजुरकर (उम्र 56 वर्ष), निवासी उसगांव, चंद्रपुर ने आरोप लगाया है कि वह खेती का व्यवसाय करते हैं और उनकी खेती उसगांव क्षेत्र में है। शिकायतकर्ता के अनुसार, खेती से जुड़े मामले को लेकर उनका परिवार और निजी कंपनी (…मेटल कंपनी) के अधिकारी के बीच पहले से विवाद चल रहा है।

शिकायत में बताया गया है कि 28 अगस्त 2026 की शाम को शिकायतकर्ता अपनी मोटरसाइकिल की मरम्मत कराने के लिए घुग्घुस क्षेत्र में गए थे। इसी दौरान संबंधित अधिकारी का उनके मोबाइल पर फोन आया और कथित रूप से उनसे उनकी लोकेशन पूछी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, बाद में फोन पर बातचीत और मुलाकात के दौरान उनकी खेती तथा कंपनी से जुड़े विवाद को लेकर कथित तौर पर धमकी दी गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उन्हें कंपनी के खिलाफ शिकायत या विवाद आगे नहीं बढ़ाने के लिए दबाव बनाया गया तथा कथित रूप से धमकी दी गई कि यदि उन्होंने शिकायत अथवा कार्रवाई जारी रखी तो उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
मामले में शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए घुग्घुस पुलिस स्टेशन में शिकायत दी। इसके आधार पर पुलिस ने NCR दर्ज कर शिकायत को रिकॉर्ड पर लिया है। दस्तावेज पर घुग्घुस पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारी की हस्ताक्षर एवं मुहर भी दर्ज है।
क्या है BNS की धारा 351(2)?
भारतीय न्याय संहिता की धारा 351 आपराधिक धमकी से संबंधित है। आधिकारिक कानून के अनुसार, किसी व्यक्ति को उसकी जान, प्रतिष्ठा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर भय पैदा करना या उसे कोई ऐसा काम करने अथवा न करने के लिए मजबूर करना, जिसके लिए वह कानूनी रूप से बाध्य नहीं है, आपराधिक धमकी की श्रेणी में आ सकता है। धारा 351(2) में इसके लिए दो वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
हालांकि, NCR दर्ज होना आरोप का अंतिम प्रमाण नहीं है। मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया में तय होगी। आरोपी पक्ष का बयान अथवा स्पष्टीकरण सामने आने पर मामले की दूसरी तस्वीर भी स्पष्ट हो सकती है।




