लेह, लद्दाख: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा कि 24 अगस्त से 2 सितंबर तक का पूरा महीना 24 सितंबर 2025 की घटनाओं को याद करने और सम्मान देने के लिए मनाया जा रहा है। उन्होंने 24 सितंबर 2025 को एक “काला दिन” बताते हुए कहा कि उस दिन पांच युवा शहीद हुए थे, जबकि कई अन्य लोग घायल, गंभीर रूप से जख्मी या स्थायी रूप से दिव्यांग हुए।
वांगचुक ने बताया कि इस अवसर की शुरुआत एक छोटे कैंडल मार्च से की गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दलाई लामा लद्दाख में हैं, इसलिए कार्यक्रम को फिलहाल सीमित रखा गया है। उनके लद्दाख से जाने के बाद इस पूरे महीने को अधिक व्यापक और तीव्र तरीके से मनाया जाएगा।
लद्दाख की मांगों को लेकर पिछले एक वर्ष की स्थिति पर बात करते हुए वांगचुक ने कहा कि लद्दाख पिछले छह वर्षों से अपने अधिकारों की मांग कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार देरी और अनिच्छा के बीच लोगों ने अपनी आवाज शांतिपूर्ण तरीके से उठाने के लिए 10 सितंबर को भूख हड़ताल शुरू की थी।

उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल के 15वें दिन जब आंदोलनकारियों की हालत गंभीर होने लगी और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, तब जनता में गहरी बेचैनी और आक्रोश पैदा हुआ। उनके अनुसार, इसी दौरान ऐसी परिस्थितियां बनीं या संभवतः बनाई गईं, जिनके कारण हिंसा की स्थिति उत्पन्न हुई। वांगचुक ने इस पूरे घटनाक्रम की जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले जांच आयोग का मुद्दा भी उठाया। वांगचुक ने कहा कि आयोग के गठन को लगभग एक वर्ष हो चुका है, लेकिन अभी तक कोई निर्णय सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की देरी से जनता का विश्वास कमजोर हो रहा है।
सोनम वांगचुक ने उम्मीद जताई कि जांच आयोग की रिपोर्ट इसी महीने सार्वजनिक की जाएगी। वहीं, 22 मई को लद्दाख की मांगों को लेकर हुई चर्चा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उसके बाद अब तक कोई बैठक नहीं हुई है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सितंबर के पहले सप्ताह में किए गए वादे के अनुसार लद्दाख की मांगों पर निर्णायक बैठक होगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो लोग अपनी आवाज और अधिक मजबूती से उठाएंगे, लेकिन आंदोलन शांतिपूर्ण ही रहेगा।




