घुग्घूस, चंद्रपुर : घुग्घूस शहर में 2 अगस्त 2026 की रात हुई एक दिल दहला देने वाली घटना ने महिलाओं की सुरक्षा और शहर की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला पर कथित जानलेवा हमला और लूट के प्रयास की घटना से पूरे शहर में आक्रोश और भय का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, अमराई वार्ड निवासी 80 वर्षीय महिला रविवार रात करीब 10 बजे बस स्टैंड से पैदल अपने घर लौट रही थीं। इसी दौरान एक युवक ने उन्हें घर छोड़ने का भरोसा दिलाकर मोटरसाइकिल पर बैठाया और सुनसान श्मशान भूमि की ओर ले गया। वहां आरोपी ने महिला के साथ बेरहमी से मारपीट की, उनके कपड़े फाड़ दिए तथा गहने लूटने का प्रयास किया।
महिला की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और साहस का परिचय देते हुए आरोपी को पकड़ लिया। बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया।
इस घटना के बाद पूरे शहर में महिलाओं के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। कांग्रेस, भाजपा, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं तथा आम नागरिकों का कहना है कि घुग्घूस में लगातार बढ़ते अपराध चिंता का विषय बन चुके हैं। लोगों का कहना है कि बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों से आए मजदूरों की मौजूदगी, अवैध गतिविधियों और कमजोर निगरानी के कारण अपराधों में बढ़ोतरी हो रही है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शहर के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों और कई अन्य स्थानों पर अवैध रूप से गांजा, हुक्का तथा एमडी जैसे नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही है। उनका कहना है कि यदि इन अवैध धंधों पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो अपराध की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
गौरतलब है कि इससे एक सप्ताह पहले रात में एक स्टांप विक्रेता पर हमला कर नकदी लूट ली गई थी। वह मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब बुजुर्ग महिला पर हमला और लूट के प्रयास की घटना ने नागरिकों की चिंता और बढ़ा दी है।
घटना की कड़ी निंदा करते हुए कुछ जनप्रतिनिधियों और सामाजिक पदाधिकारियों ने पुलिस निरीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपकर आरोपी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने, शहर में चल रहे अवैध धंधों पर तत्काल अंकुश लगाने तथा महिलाओं और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब शहरवासियों की निगाहें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि अपराध और अवैध गतिविधियों पर समय रहते सख्ती नहीं की गई, तो नागरिकों का सुरक्षा व्यवस्था से विश्वास कमजोर हो सकता है।




