अधिकारियों की बैठकों से आगे कब दिखेगी सख्त कार्रवाई?
प्रणयकुमार बंडी
चंद्रपुर : जिले में बढ़ते नशे के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने एक बार फिर नार्को-कोऑर्डिनेशन समिति की बैठक आयोजित की। बैठक में जिलाधिकारी वसुमना पंत ने पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, आबकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन सहित विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियां सौंपते हुए चंद्रपुर को नशामुक्त बनाने के निर्देश दिए। अधिकारियों को स्कूलों, कॉलेजों, मेडिकल स्टोर्स, हॉस्टलों, कूरियर सेवाओं और परिवहन माध्यमों पर विशेष निगरानी रखने के आदेश भी दिए गए।
बैठक में दिए गए निर्देश निश्चित रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल बैठकों और निर्देशों से नशे के बढ़ते नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सकेगा?
ज़मीनी हकीकत चिंताजनक
चंद्रपुर जिले के कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की उपलब्धता को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। युवाओं और विद्यार्थियों में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति को स्वयं प्रशासन ने गंभीर माना है। इसके बावजूद आम नागरिकों का आरोप है कि कई स्थानों पर खुलेआम नशीले पदार्थों की बिक्री होती है, लेकिन कार्रवाई या तो सीमित रहती है या फिर कुछ दिनों बाद स्थिति पहले जैसी हो जाती है।
स्कूलों और कॉलेजों के आसपास निगरानी बढ़ाने की बात हर बैठक में होती है, लेकिन अभिभावकों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों के आसपास संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नियंत्रण अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मेडिकल स्टोर्स और कूरियर नेटवर्क पर सवाल
जिलाधिकारी ने मेडिकल दुकानों की आकस्मिक जांच और अवैध रूप से नशे में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की बिक्री पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लेकिन सवाल यह है कि पिछले वर्षों में कितनी दुकानों की जांच हुई, कितनों के लाइसेंस निलंबित हुए और कितनों पर कानूनी कार्रवाई हुई? यदि यह जानकारी सार्वजनिक की जाए तो अभियान की गंभीरता का वास्तविक आकलन हो सकेगा।
इसी प्रकार कूरियर और पार्सल सेवाओं के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी की आशंकाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में निगरानी और खुफिया तंत्र की प्रभावशीलता ही सफलता तय करेगी।
केवल जागरूकता नहीं, परिणाम भी चाहिए
निबंध प्रतियोगिता, रैलियां और जनजागरूकता कार्यक्रम आवश्यक हैं, लेकिन नशे के संगठित कारोबार पर प्रभावी रोक तभी संभव है जब सप्लाई चेन पर लगातार और कठोर कार्रवाई हो। जनता यह जानना चाहती है कि नशा बेचने वालों, तस्करों और अवैध कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कितने मामले दर्ज हुए, कितनी गिरफ्तारियां हुईं और कितनों को सजा मिली।
जनता की अपेक्षा
चंद्रपुर को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य सराहनीय है, लेकिन इसके लिए विभागों के बीच समन्वय के साथ-साथ नियमित छापेमारी, पारदर्शी कार्रवाई और जवाबदेही भी जरूरी है। यदि प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देश धरातल पर पूरी गंभीरता से लागू किए जाते हैं तो निश्चित रूप से सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। अन्यथा यह अभियान भी केवल बैठकों और कागजी निर्देशों तक सीमित रहने का खतरा रखता है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन की सख्त चेतावनियों के बाद जिले में नशे के कारोबार पर वास्तव में कितनी प्रभावी कार्रवाई दिखाई देती है।




